छतेरी गांव में डेंगू के प्रकोप जानलेवा होता जा रहा है। मंगलवार को डेंगू से पीड़ित एक और महिला आशा देवी (55) की दीनदयाल अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसकी जानकारी होने पर गांव में दहशत फैल गई है। मृतक के बेटे विनोद गुप्ता ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएमओ से शिकायत की। इसके बाद सीएमओ के निर्देश पर गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और बुखार से पीड़ित 90 लोगों का इलाज किया।
छतेरी गांव में एक पखवारे से वायरल बुखार और डेंगू का प्रकोप फैला हुआ है। कुछ दिनों पहले पंचम राम की पत्नी लक्ष्मीना की डेंगू मौत हो गई थी। गांव में करीब सौ लोग बीमार हैं, जिनमें से कई लोगों का इलाज वाराणसी के निजी अस्पतालों में चल रहा है। दो अक्तूबर को आशा देवी की हालत बिगड़ने पर परिवार के लोग उन्हें निजी अस्पताल ले गए थे, जहां चिकित्सकों ने बनारस के लिए रेफर कर दिया था।
इसके बाद परिवारीजन उन्हें दीनदयाल अस्पताल ले गए, जहां बेड खाली न होने की बात कर डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया। सोमवार को परिवार के लोग आशा देवी को फिर से दिन दयाल अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि वहां बेड न मिलने पर जमीन पर ही लेटाकर उनका इलाज शुरू किया गया। मंगलवार को भोर में करीब तीन बजे आशा देवी की मौत हो गई।
आशा देवी के बेटे विनोद गुप्ता का आरोप है कि इलाज में लापरवाही के कारण उनकी मां की मौत हुई है। विनोद ने सीएमओ से इसकी शिकायत की। इसके बाद सीएमओ के निर्देश पर संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. एके पांडेय के नेतृत्व में जिला जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एमए खान, डॉ. देवेन्द्र सिंह, डॉ. आरके सिंह और शेषधर त्रिवेदी की टीम ने छतेरी गांव में पहुंचकर कैंप लगाया।
चिकित्सकों ने यहां नालियों, घरों आैर सार्वजनिक स्थलों पर छिड़काव कराया। कैंप में वायरल बुखार से पीड़ित 90 लोगों का इलाज किया गया। गांव वालों ने बताया कि आशा देवी के के परिवार के अनुराग, टिंकू और नीतू भी डेंगू की चपेट में हैं, जिनका वाराणसी स्थित निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, डॉ. एके पांडेय ने बताया कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक टीम गांव में कैंप जारी रखेगी।