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चंद्रयान-2 से विक्रम से संपर्क टूटने पर बोले विद्वान- चांद पर उतरे नहीं तो क्या, चमक तो बढ़ गई

Sun, 08 Sep 2019 12:37 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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चंद्रयान- 2 के विक्रम से संपर्क टूटने पर काशी के विद्वानों के राय। - फोटो : PTI
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चंद्रयान- 2 के विक्रम से संपर्क टूटने पर काशी के विद्वानों के मन में कसक तो है, लेकिन वह इसरो वैज्ञानिकों के प्रयास और इसमें अब तक मिली सफलता से खुश हैं। उनका मानना है कि विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में सफलता और असफलता साथ-साथ चलती है। चंद्रयान टू से संपर्क जरूर टूटा है, लेकिन अभी बहुत संभावनाएं बची हैं। हम चांद पर उतर नहीं सके तो क्या, चांद पर पहुंच गए, यह बड़ी सफलता है। इसरो के वैज्ञानिकों ने अपने इस प्रयास से भारत का डंका पूरी दुनिया में बजा दिया।

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विज्ञान संकाय के  निदेशक डॉ अनिल त्रिपाठी कहते हैं कि सेटेलाइट टेक्नोलॉजी में दुनियाभर में भारत का डंका बज रहा है। गलतियों से ही सीखने को मिलता है। इस बार हम सिर्फ दो किलोमीटर दूर रह गए। यह भी सफलता ही है। आने वाले समय में सफलता मिलकर ही रहेगी।

डॉ. अनिल त्रिपाठी

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आईआईटी बीएचयू के भौतिकी विभाग के प्रो प्रभाकर ने बताया कि विज्ञान में असफलता और सफलता दोनों साथ-साथ रहती हैं। असफलता को परिणाम के रूप में लेकर आगे बढ़ते रहना चाहिए। हमारे वैज्ञानिकों का प्रयास सराहनीय है, उनकी वजह से हमने अंतरिक्ष में छलांग लगाई है।

प्रो प्रभाकर

बीएचयू के ही भौतिकी विभाग के प्रो अभय कुमार सिंह ने कहा कि वैज्ञानिकों ने अच्छा प्रयास किया। हमें सफलता भी मिली है। अभी आर्बिटर अच्छे से घूम रहा है। इससे हमें साल भर तक जानकारियां मिलती रहेंगी। विक्रम लैंडर से संपर्क टूट तो गया, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब सफलता मिलेगी।

प्रो अभय कुमार सिंह

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि चंद्रमा पर पहुंच जाना बहुत बड़ी सफलता है। विज्ञान और तकनीक से जुड़े कामकाज में असफलताएं तो मिलती हैं, लेकिन इससे विचलित होने की जरूरत नहीं है। वैज्ञानिकों का हौसला बरकरार है। सफलता तो हमें मिलकर रहेगी।

अस्सिस्टेंट प्रोफेसर भू भौतिकी डॉ संदीप अरोड़ा ने कहा कि लक्ष्य से पहले चंद्रयान-2 का संपर्क टूट जाना निराशाजनक रहा, लेकिन इससे इसरो का महत्व कम नही हो जाता है। हम अपने मिशन के इतना करीब पहुंचे, इसके लिए इसरो की टीम को ढेर सारी बधाई। हमें अपनी स्पेस ऑर्गेनाईजेशन पर गर्व है।

बच्चों ने बनाया चंद्रयान का मॉडल :
सेंट्रल जेल रोड स्थित रेनबो पब्लिक स्कूल में छात्रों ने चंद्रयान का मॉडल बनाकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। छात्रों ने ‘आगे ही आगे बढ़ाएंगे कदम’ जैसे स्लोगन के साथ वैज्ञानिकों के प्रयास पर गर्व जताया और जल्द सफलता की कामना की। पवन सिंह के निर्देशन में बच्चों ने चंद्रयान-टू से जुड़े सवालों के जवाब भी दिए। इस दौरान प्रधानाचार्य सोनम श्रीवास्तव, सूर्या वर्मा, प्रिंस  गुप्ता, निदेशिका सुशीला आदि मौजूद रहे। 

वैज्ञानिकों की मेहनत सराहनीय : क्षेत्रीय अध्यक्ष
भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष महेश चंद श्रीवास्तव ने इसरो के वैज्ञानिकों के प्रयास की सराहना की। कहा कि हमें देश के वैज्ञानिकों पर गर्व है। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। हर मुश्किल, हर संघर्ष, हर कठिनाई, हमें कुछ नया सिखाकर जाती है। मीडिया प्रभारी नवरतन राठी ने कहा कि चंद्रयान-2 मिशन के लिए वैज्ञानिकों की मेहनत की जितनी सराहना की जाए, वह कम है।
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पेंटिंग में दिखा चंद्रयान-2
पेंटिंग व काशी यूथ मॉडल यूनाइटेड नेशन के तत्वावधान में आर्य महिला नागरमल मुरारका मॉडल स्कूल में शनिवार को चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में भी चंद्रयान 2 दिखा। प्रतियोगिता में 100 छात्राओं ने भाग लिया। अध्यक्ष प्राप्ति चौहान ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य था कि छात्राएं राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी भूमिका और जिम्मेदारी पहचानें।

रंगों के माध्यम से छात्राओं ने अपने मन के भावों को व्यक्त किया। कार्यक्रम का उद्र्घाटन स्कूल की प्रबंधक पूजा दीक्षित ने किया। प्रधानाचार्या अंजना दीक्षित, शिल्पा गुजराती, ज्योति और ऋतुराज ने सहयोग किया। कार्यक्रम का संचालन हितैषी चौहान ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से संचिता, जागृति, फराह, प्रियम् और दिव्या उपस्थित रहीं।
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