वाराणसी। इंदिर गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की ओर से विद्वानों ने आचार्य कमलेशदत्त त्रिपाठी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साहित्य, व्याकरण के क्षेत्र में किए गए योगदान को सराहा। कहा कि आचार्य कमलेश का ज्ञान केवल एक शास्त्र तक ही सीमित नहीं था। उनका भाषापरक ज्ञान भी अद्भुत था। कला केंद्र सभागार में काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि भारतीय विद्या में आचार्य कमलेशदत्त की जितनी पकड़ थी, पाश्चात्य विद्या में भी उनकी उतनी ही पैठ थी। साहित्य, व्याकरण, दर्शन, सौंदर्यशास्त्र पर उनका समानाधिकार था। प्रो. कृष्णकांत शर्मा ने कहा कि विद्या के प्रति आचार्य जी की जितनी निष्ठा थी, सम्बन्धों के निर्वहन में भी वे उतने ही पटु थे। प्रो. जयशंकरलाल त्रिपाठी ने कहा कि आचार्य जी एक उत्कृष्ट समालोचक थे। इस दौरान क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अभिजीत दीक्षित, प्रो.रामचन्द्र पाण्डेय, प्रो. प्रद्योत कुमार मुखोपाध्याय, प्रो. युगल किशोर मिश्र, प्रो. जयशंकरलाल त्रिपाठी, प्रो. कृष्णकान्त शर्मा, प्रो. विजय शंकर शुक्ल मौजूद रहे।