Varanasi News: इस बार सावन के सोमवार पर नापंचमी का पर्व मनाया जाएगा। यह दुर्लभ योग 23 साल बाद बना है। वहीं इस सावन में नागपंचमी, हरियाली तीज और रक्षाबंधन के पर्व के साथ ही कुल 15 व्रत व त्योहार पड़ेंगे।
भगवान शिव का अतिप्रिय सावन का महीना बृहस्पतिवार को शुरू हो गया। अब सावन भर उत्सव जैसा माहौल रहेगा। इस मास के व्रत और त्योहारों में भगवान शिव की प्रधानता रहेगी। नागपंचमी, हरियाली तीज और रक्षाबंधन के पर्व के साथ ही चार सोमवार और मंगला गौरी के व्रत सहित कुल 15 व्रत व त्योहार पड़ेंगे। सावन का पहला सोमवार तीन अगस्त को है। 23 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब सावन का सोमवार और नागपंचमी एक ही दिन पड़ रहा है।
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हिंदू पंचांगों और सनातन परंपरा में सावन मास का विशेष महत्व है। सावन की शुरुआत भगवान श्रीहरि विष्णु को प्रिय दिन बृहस्पतिवार से हुई। वहीं, समापन देवी के प्रिय दिन शुक्रवार को होगा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष व प्रख्यात ज्योतिषविद प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि सावन में प्रमुख व्रत व त्योहारों में सावन का सोमवार, मंगला गौरी व्रत, नागपंचमी, हरियाली तीज और नागपंचमी है। इस मास में जो भी व्रत, त्योहार और पूजा पाठ होते हैं, सभी भगवान शिव को समर्पित होते हैं। व्रत व त्योहारों में भगवान प्रधान देवता के रूप में होते हैं।
11 को शिवरात्रि, 15 अगस्त को हरियाली तीज
सावन में चार सोमवार के साथ मंगला गौरी के व्रत पड़ेंगे। पहला सोमवार तीन अगस्त, दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त को है। इसी दिन नागपंचमी का शुभ संयोग भी कई वर्ष बाद बन रहा है। चौथा सोमवार 24 अगस्त को है। जबकि मंगला गौरी व्रत 31 जुलाई, चार, 11, 18 और 25 अगस्त को है। कामिका एकादशी आठ अगस्त, सावन की शिवरात्रि 11 अगस्त, हरियाली अमावस्या 12, हरियाली तीज 15 अगस्त को है। पुत्रदा एकादशी 23, रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त है।
निकलेंगी यात्राएं और कथाएं भी होंगी
सावन में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तमाम यात्राएं भी निकाली जाती हैं। कांवड़ यात्रा, पंचक्रोशी परिक्रमा यात्रा, द्वादश ज्योतिर्लिंग, वृहद त्रिशूल यात्रा, एकादश महारुद्र शिवलिंग दर्शन यात्रा, बैजनाथ धाम यात्रा, श्रीकेदारेश्वर अंर्तगृही दर्शन यात्रा सहित अन्य यात्राएं निकाली जाती हैं। इसके अलावा देवी यात्रा भी निकाली जाती है। इसके साथ मठों, आश्रमों, मंदिरों व प्रतिष्ठानों में श्रीमद्भागवत कथा, विष्णुपुराण, शिवपुराण व मानस कथा होगी।