काशी विश्वनाथ धाम में मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारी
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मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि सावन में पहली बार श्रद्धालु गंगा जल लेकर बाबा का अभिषेक कर सकेंगे। अधिकारियों ने मुख्य सचिव को बताया कि सावन के सोमवार पर छह लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। उसी के अनुसार तैयारियां की जा रही हैं।
मुख्य सचिव डीएस मिश्र ने कहा कि सावन माह में न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जिले और दूरदराज से भी लोग बाबा विश्वनाथ को जल अर्पित करने आते हैं। ऐसे में आसपास के सभी जिलों के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर तैयारी करें। प्रयागराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग मार्ग तय किए जाएं ताकि उस पर वाहनों का आवागमन न हो सके। कावड़ियों के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, पेयजल तथा अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का निर्देश दिया।
पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने बताया कि जिस-जिस मार्ग से श्रद्धालुओं को आना है उस मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए ही तय कर दिया जाएगा। सुविधा केंद्र, सहायता केंद्र बनाए जाएंगे। पुलिस महानिदेशक देवेंद्र सिंह चौहान ने सावन माह में आने वाली महिला श्रद्धालुओं की व्यवस्था के लिए रूटों पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती और उनकी सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए।
जलाभिषेक के लिए जाते यादव बंधु (फाइल)
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सावन के पहले सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के लिए चंद्रवंशी गोप सेवा समिति की बैठक हुई। संरक्षक पारसनाथ यादव के आवास पर हुई बैठक में 18 जुलाई को होने वाले प्रथम सोमवार को होने वाले जलाभिषेक व कलश यात्रा पर चर्चा हुई। कलश यात्रा में दस हजार यादव बंधु शामिल होंगे। इस दौरान काली शंकर यादव, विमलेश यादव, शशि प्रकाश चंदन और पीयूष यादव का सम्मान किया गया। बै
काशी धर्म परिषद ने सावन में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग पर जल चढ़ाने की अनुमति मांगी है। इसके साथ ही कहा है कि सावन में काशी विश्वनाथ परिसर में पवित्रता का सिद्धांत लागू किया जाए। रविवार को लमही स्थित सुभाष भवन में आयोजित धर्म परिषद की बैठक में देश के वर्तमान हालात पर चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे महंत बालक दास ने कहा कि धार्मिक भावनाएं आहत करने और लोक व्यवस्था को भंग करने वालों पर देश भर में मुकदमे दर्ज होने चाहिए। इसके लिए धर्म परिषद भी सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखेगी। कहा कि उदयपुर और अमरावती की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
इससे संत समाज में नाराजगी है। हत्या के लिए उकसाने वालों को भी कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। इस दौरान आठ प्रस्ताव पारित किए गए। इसमें हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करने वालों पर एफआईआर, आदि विश्वेश्वर पर जल चढ़ाने की अनुमति, महंत बालक दास को उच्च स्तरीय सुरक्षा देने और देशभर में साजिश के तहत फैलाई जा रही हिंसा को तत्काल रोका जाए।