सारनाथ। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सारनाथ का नाम जल्द ही शामिल हो सकता है। इसके लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में प्रस्ताव और शोध दस्तावेज (डोजियर) तैयार करने वाले अभय नारायण लांबा, संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारी बुसान गए हैं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल 19 से 29 जुलाई तक बुसान में आयोजित यूनेस्को की बैठक में भाग लेगा।
इसे लेकर यूनेस्को की टीम गत वर्ष 24 सितंबर को तीन दिवसीय दौरे पर काशी आई थी। अधिकारियों के मुताबिक, तथागत की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने पर उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन जाएगा। सारनाथ में चौखंडी स्तूप और धमेख स्तूप संरक्षित पुरातात्विक स्मारकों में शामिल हैं। संस्कृति मंत्रालय की ओर से सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए डोजियर तैयार कराया गया था। यह डोजियर जनवरी 2025 में जमा किया गया।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। इनके बाद सारनाथ भी इस सूची में शामिल हो सकता है। सारनाथ में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 11वीं शताब्दी तक के बौद्ध स्मारक मौजूद हैं। भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश से जुड़ा होने के कारण यह विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसके प्रस्ताव को पर्यटन विभाग ने तैयार कर संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से यूनेस्को के समक्ष प्रस्तुत किया था।