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Saraswati Puja: 111 साल में 5वीं बार शुक्रवार को पड़ा स्थापना दिवस, 1962 के बाद पहली बार; होगी पूजा

Fri, 23 Jan 2026 05:02 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त बीती आधी रात 2:29 बजे से शुरू हो गया है। माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 घंटे 17 मिनट की होगी। शुक्रवार के बाद 24 जनवरी की आधी रात 1ः46 बजे तक पंचमी का शुभ मुहूर्त होगा।
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काशी में मां सरस्वती के लगे जयकारे। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बीएचयू, वसंत और शुक्रवार की क्रोनोलॉजी बेहद खास है। इस बार विश्वविद्यालय के 111 साल के इतिहास में पांचवीं बार स्थापना दिवस शुक्रवार को मनाया गया। वहीं, इससे पहले 67 साल पहले 1962 में शुक्रवार को स्थापना दिवस मनाया गया था। जबकि 1916 में बीएचयू की नींव भी शुक्रवार को पड़ी और आज 2026 में भी शुक्रवार को ही विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। 

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111 साल में पांच बार स्थापना दिवस शुक्रवार को पड़ा। महामना की इच्छा पर वसंत पंचमी के दिन बीएचयू की स्थापना का मुहूर्त तय किया गया था।  इससे पहले 15 फरवरी 1918, 27 जनवरी 1928, आठ फरवरी 1935 और 9 फरवरी 1962 को स्थापना दिवस मनाया जा चुका है। वहीं 19 जनवरी 2029 में शुक्रवार को 115वां स्थापना दिवस होगा।  

सूर्याेदय से सूर्यास्त के बाद तक कार्यक्रम: स्थापना दिवस पर आज सूर्याेदय से लेकर सूर्यास्त के बाद तक कई कार्यक्रम होंगे। छह घंटे तक झांकियां निकलेंगी। शाम को बिड़ला हॉस्टल में कवि सम्मेलन होगा। बीएचयू के छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह की ओर से सूचित किया गया है कि बीएचयू के स्थापना दिवस में विवि परिवार के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया गया है। 
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सुबह 10 बजे से 31 झांकियों की शोभायात्रा: आज सुबह सात बजे ट्राॅमा सेंटर स्थित स्थापना स्थल मंदिर पर पूजनोत्सव का कार्यक्रम होगा। फिर सुबह 10 बजे से 31 झांकियों की शोभायात्रा शुरू हो जाएगी। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी एलडी गेस्ट हाउस से झंडी दिखाकर झांकियों को रवाना करेंगे। शाम को सात बजे के बाद बिड़ला हॉस्टल में कवि सम्मेलन होगा। 

आज कई रास्ते घंटों तक रहेंगे बंद
बीएचयू के स्थापना दिवस पर झांकी निकलने के चलते कई रास्ते घंटों तक बंद रहेंगे। आवागमन पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। छात्रावास रोड से महिला महाविद्यालय तिराहा, विजय मधुबन तिराहा से हिंदी भवन तक के क्षेत्र में सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन सुबह 9 बजे से कार्यक्रम की समाप्ति तक प्रतिबंधित रहेगा। आम लोगों से अपील की गई है कि इस इस व्यवस्था का पालन करते हुए व्यवस्था में सहयोग करें। 

गोयनका महाविद्यालय में शताब्दी वर्ष समारोह शुरू 
गोयनका संस्कृत महाविद्यालय के 100 वर्ष पूर्ण होने पर बृहस्पतिवार को शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन किया गया। शुभारंभ श्रीरामचरितमानस के अखंड पाठ से हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य आचार्य राजेंद्र कुमार द्विवेदी ने गणेश पूजन, नवग्रह पूजन एवं राम दरबार का वेद मंत्रों के साथ विधिवत पूजन-अर्चन किया। प्राचार्य आचार्य राजेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि 23 जनवरी को महाविद्यालय का स्थापना दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर आचार्य डॉ. मनोज मणि त्रिपाठी, डॉ. अवनीश द्विवेदी, डॉ. अनुज द्विवेदी आदि मौजूद रहे। 

सरस्वती संग शिव को प्रिय है वसंत पंचमी
वसंत पंचमी मां सरस्वती के साथ ही बाबा विश्वनाथ के लिए भी बेहद खास है। इसी काल में औघड़दानी को जीवनसाथी मिलती हैं। बृहस्पतिवार को वसंत पंचमी के साथ बाबा का तिलकोत्सव भी है। काशी के 550 पंडालों में बृहस्पतिवार को सरस्वती पूजा होगी। इस बार पंडालों की विविधता देखने को मिलेगी।

रामापुरा की नई बस्ती में महिला क्रिकेट टीम को विश्व कप देती हुईं देवी सरस्वती घाघरा-चोली में दर्शन देंगी। भदैनी स्थित पूजा पंडाल में देवी सरस्वती एक बच्चे को पुस्तक देकर मोबाइल से दूर रहने का आशीर्वाद देंगी। सोनिया की गुजराती गली में मोबाइल चलाते बच्चों के पीछे माता सरस्वती चिंतित मुद्रा में दिखेंगी। भदैनी के न्यू भारत क्लब में अष्टभुजा वाली देवी सजाई गई हंै। खोजवां पुस्तकालय में राजस्थानी परिधान में दर्शन देंगी। 

चेतगंज में 32 फीट की मूर्ति : काशी की सबसे बड़ी 32 फीट की मूर्ति भारत की महारानी स्वरूप में चेतगंज में स्थापित की गई है। चार भुजाएं हैं। दो हाथ दोनों ओर 8-8 फीट के शेरों की पीठ पर होंगे। तीसरा हाथ अभयदान की मुद्रा और चौथे में किताब में होगा। 

विज्ञान के शिक्षक और छात्र सफेद-पीले परिधान में ही आएं
बीएचयू के विज्ञान संस्थान ने ड्रेस कोड लागू किया है। सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र और छात्राओं को सफेद या पीले रंग का परिधान पहनने की बात कही गई है। संकाय प्रमुख की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि इन्ही रंग के पारंपरिक परिधान को पहनना सुनिश्चित करें। वहीं सुबह 9 बजे तक महामना हॉल में पहुंचे। 

झांकी में भाष्कराचार्य के गुरुत्वाकर्षण बल की खोज
बीएचयू में 4-5 किलोमीटर तक ड्रोन से लेकर द्रोणाचार्य तक की संस्कृति दिखेगी। पहली बार महर्षि अगस्त्य की प्राचीन विद्युत बैटरी तकनीक, भाष्कराचार्य का आकर्षण शक्ति सिद्धांत, वैदिक गणित, प्राचीन जल शोधन विधि जैसे सिद्धांतों की झांकियां दिखाई जाएंगी। दूसरी ओर आईआईटी बीएचयू एआई और ड्रोन उड़ाकर भारत की उभरती तकनीकी शक्ति की मिसाल पेश करेगा। 

प्राचीनता वाली झांकियों में बताया जाएगा कि कैसे न्यूटन से 500 साल पहले भाष्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण बल की खोज की थी। ये झांकी वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. विनय कुमार पांडेय के निर्देशन और डॉ. पंकज कुमार तिवारी की देखरेख में तैयार हुआ है। छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार ने कहा कि यदि आपको विवि की विविधता देखनी हो तो सबसे अच्छा दिन वसंत पंचमी का ही है। 

बीएचयू की झांकी में प्राचीन जल शोधन विधि को दिखाया जाएगा। प्राचीन काल में अंजन, मोधा, वड़, राजकेशर, आंवला, निर्मली इन सभी को एक बराबर मात्रा में चूर्ण बनाकर डालने पर जल शोधन होता है। इसका वर्णन वराहमिहिर ने अपने प्रसिद्ध संहिता ग्रंथ वृहदसंहिता के दकार्गलाध्याय में किया है।
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आकर्षण शक्ति सिद्धांत भाष्कराचार्य ने किया था स्थापित
प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि आकर्षण शक्ति सिद्धांत का श्रेय आधुनिक काल में न्यूटन को दिया जाता है लेकिन भाष्कराचार्य ने इसे स्थापित किया था। उन्होंने सिद्धांत शिरोमणि के गोलाध्याय खंड में स्पष्ट रूप से लिखा है कि पृथ्वी में एक आकर्षण शक्ति है। इसके प्रभाव के कारण वह ऊपर फेंके गए अन्य आकाशीय पदार्थों और वस्तुओं को अपनी ओर खींचती है। इसी तरह से महर्षि अगस्त्य ने अगस्त्य संहिता ग्रंथ में विद्युत उत्पादन विधि का वर्णन किया है।
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