चौबेपुर थाना क्षेत्र के छितौनी गांव निवासी संतोष मूरत सिंह के खिलाफ वर्ष 2019 में मारपीट, छेड़खानी के साथ ही एससी-एसटी एक्ट की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने मामले की विवेचना की और आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया।
सरकारी दस्तावेजों में मृत और खुद को जिंदा साबित करने के लिए गले में ‘मैं जिंदा हूं’ का बोर्ड टांगकर लगभग डेढ़ दशक से अफसरों के कार्यालयों का चक्कर काटने वाले छितौनी गांव निवासी संतोष मूरत सिंह को सोमवार को चौबेपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, संतोष के खिलाफ पुराने मामले में अदालत ने वारंट जारी किया था।
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चौबेपुर थाना क्षेत्र के छितौनी गांव निवासी संतोष मूरत सिंह के खिलाफ वर्ष 2019 में मारपीट, छेड़खानी के साथ ही एससी-एसटी एक्ट की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने मामले की विवेचना की और आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया। इसी मामले में अदालत ने गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। अब पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।
नाना पाटेकर का बावर्ची बना तो पट्टीदारों ने मृत बता हथियाई संपत्ति
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2000 में एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में अभिनेता नाना पाटेकर वाराणसी आए थे। इसी दौरान नाना पाटेकर के संपर्क में संतोष मूरत आया और उनके साथ मुंबई चला गया। मुंबई में वह नाना पाटेकर के घर में बावर्ची का काम करने लगा। मां-बाप की पहले ही मौत हो चुकी थी, इसलिए मुंबई में ही मन लग गया। लगभग तीन साल बाद वह घर आया तो पता लगा कि पट्टीदारों ने साजिशन सरकारी दस्तावेजों में उसे मृत घोषित करा दिया। साथ ही उसकी संपत्तियां अपने नाम करा लीं। यह अफवाह भी फैला दी कि संतोष मूरत की ट्रेन में हुए धमाके में मौत हो गई। इसके बाद संतोष ने गले में ‘मैं जिंदा हूं’ का बोर्ड टांग लिया और सरकारी कार्यालयों का चक्कर काटने लगा।
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संतोष मूरत
- फोटो : अमर उजाला
जिलाधिकारी तक गए थे सरकारी दस्तावेजों में मृत संतोष के घर
विरोध प्रदर्शन की वजह से ही तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने मामले का संज्ञान लिया था। वह संतोष मूरत के घर भी गए। प्रशासनिक स्तर पर मदद भी कराई, लेकिन उनके तबादले के साथ स्थिति फिर जस की तस हो गई। संतोष मूरत की जमीन से संबंधित कागजात तहसील की फाइलों में ही दब कर रह गए।
संतोष खुश होकर बोला, पुलिस ने माना तो मैं जिंदा हूं
गिरफ्तारी के बाद संतोष मूरत सिंह खुश दिखा। पुलिस कस्टडी में उसने कहा कि अच्छा हुआ। कम से कम पुलिस ने तो माना कि मैं जिंदा हूं। पुलिस ने मुकदमे में गिरफ्तार किया है। लिख-पढ़कर जेल भेज रही है। इसे कोई झुठला भी नहीं सकता है। वर्षों पुरानी इच्छा पूरी हुई है। अब सरकारी दस्तावेजों में भी जिंदा होने की उम्मीद जगी है।
हर वीआईपी मूवमेंट पर पकड़ लेती थी पुलिस
संतोष मूरत सिंह के अनुसार, जब भी जिले में वीआईपी मूवमेंट होता था, तब पुलिस उसे पकड़ कर बैठा लेती थी। लेकिन, कभी उसके खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज किया। ऐसा 60 से 65 बार हुआ। पुलिस को लगता था कि वह हंगामा कर माहौल बिगाड़ने का काम करेगा। संतोष ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ कि पुलिस ने गिरफ्तार किया। कानूनी प्रक्रिया के तहत वह जेल जा रहा है। पुलिस की यह कार्रवाई उसे सरकारी अभिलेखों में जिंदा साबित करने में एक अहम कड़ी साबित हो सकती है।
विधानसभा चुनाव का नामांकन पत्र हुआ था रद्द
संतोष मूरत ने वर्ष 2022 में शिवपुर विधानसभा से नामांकन पत्र दाखिल किया गया था। हालांकि संतोष मूरत का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया था। उस दौरान उसने कलेक्ट्रेट गेट के सामने अधिकारियों का पैर पकड़ कर हाई वोल्टेज ड्रॉमा किया था।