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Pandit Shiv Kumar Sharma Death: संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का निधन, काशी से था गहरा लगाव

Tue, 10 May 2022 04:35 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वे 1992 से वाराणसी में संकट मोचन संगीत समारोह में प्रतिवर्ष आते रहे। कोरोना काल के दो साल यहां नहीं आ सके। इस वर्ष भी हनुमत दरबार में आना था लेकिन वे नहीं आ सके।
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संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का निधन। - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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कश्मीर से कन्याकुमारी तक संगीत की धारा एक सूत्र में पिरोने वाले महान संगीत साधक शिवकुमार शर्मा का मंगलवार को मुंबई में निधन हो गया। उन्हें पद्म विभूषण व पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने वाराणसी में गंगा महोत्सव के साथ ही कई बार संकट मोचन संगीत समारोह में भी प्रस्तुतियां दीं।

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उनके निधन पर संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि शिवकुमार शर्मा का निधन संगीत साधकों के लिए अपूर्णनीय क्षति है। उनके निधन से न सिर्फ काशी के कला साधकों का मन मर्माहत है बल्कि विश्व के कला प्रेमियों के लिए दुखद घड़ी है। बताया कि शिवकुमार शर्मा का वाराणसी घराने से गहरा जुड़ाव था।

वे 1992 से संकट मोचन संगीत समारोह में प्रतिवर्ष आते रहे। कोरोना काल के दो साल वे यहां नहीं आ सके। इस वर्ष भी हनुमत दरबार में आना था लेकिन वे नहीं आ सके। शिवकुमार शर्मा तबला वादन और संतूर वादन में माहिर थे। जब भी यहां से बुलावा गया, बिना किसी औपचारिकता का इंतजार किए इस तरह चले आए जैसे अपने घर आ रहे हों।
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उनका जाना बनारस के संगीत जगत को भी अखर गया। सितार वादक देवब्रत मिश्र का कहना है कि पद्म विभूषण पंडित शिवकुमार शर्मा का जाना दुखद है। उन्होंने वाद्ययंत्र संतूर को शास्त्रीय संगीत में नई ऊंचाई प्रदान की। भारतीय संगीत के वे एक नक्षत्र के रूप में थे।
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काशी की संगीत परंपरा से भी उनका गहरा रिश्ता था। उनके पिताजी बनारस के प्रसिद्ध गायक पंडित बड़े रामदास मिश्र के शिष्य थे और पंडित शिवकुमार शर्मा ने संगीत की शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की इस नाते उनकी संगीत में बनारस की झलक दिखती है।
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