फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भजन सोपोरी ने संतूर पर राग जोग से झुमाया

Mon, 07 Mar 2016 02:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
ध्रुपद मेले में संतूर वादक पं. भजन सोपोरी।
विज्ञापन
देश के दिग्गज कलाकारों ने रविवार की रात ध्रुपद मेले में अपनी साधना की खुशबू से देश-दुनिया के संगीत प्रेमियों को मदहोश किया। पं. भजन सोपोरी के संतूर पर सुर संतूर की जुगलबंदी बेमौसम बादलों की गरज-तरज के बीच यादगार बन गई। उस्ताद वसीफुद्दीन डागर की बेजोड़ ध्रुपद अलापचारी ने मुग्ध किया तो जाने माने पखावज वादक पं. दालचंद शर्मा ने ताल पर बाज जैसी तीव्रता का एहसास कराया। चित्रकारों ने रागों-बंदिशों के भावों को रंगों-रेखाओं में जीवंत किया।   
विज्ञापन

गंगा किनारे ध्रुपद तीर्थ पर संगीत मेले की तीसरी निशा का आगाज पं.दालचंद शर्मा के पखावज वादन से हुआ। इन्होंने नाथद्वारा शैली की परंपरागत बंदिश को तालों में निबद्ध कर बजाया तो संगीत प्रेमी झूमने लगे। इसके बाद उन्होंने बाज परन की प्रस्तुति की। इसमें उन्होंने तालों पर बाज जैसी तीव्रता का एहसास कराया। सारंगी पर पं.संतोष मिश्र, तानपूरे पर वरुण ने संगत की। इनके बाद शशिकांत पाठक ने पखावज वादन से संगीत निशा को गति प्रदान की। सारंगी पर लहरा दिया महाश्वर दयाल नागर ने।     इनके बाद उस्ताद वसीफुद्दीन डागर ने राग पूरिया में अलापचारी की। इसके बाद राग वसंत में चौताल की बंदिश उन्होंने पेश की। बंदिश के बोल थे- नवल रंग प्रफुल्लित चहुंओर...। इन्होंने राग हिंडोला में धमार की बंदिश- ब्रज में देखो धूम मचाई से विराम लिया। इनके बाद प्रसिद्ध संतूर वादक पं. भजन सोपोरी ने मंच संभाला। सोपोरी के आते ही तालियां गूंजने लगीं।
विज्ञापन
    उन्होंने संतूर पर राग जोग की अवतारणा की। अलाप, जोड़, झाला के बाद ध्रुपद अंग की रचनाएं बजाईं। इनके साथ सुर संतूर पर जुगलबंदी की कश्मीरी शिष्या वीथिका ने। पखावज पर संगत की ऋषि शंकर उपाध्याय ने। इस मौके पर कुंवर अनंत नारायण सिंह के अलावा संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र भी उपस्थित थे। संचालन डॉ. राजेश्वर आचार्य ने किया। 
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
MORE
AU ऐप में पढ़ें