संकटमोचन संगीत समारोह में मालिनी अवस्थी।
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भाव-विभोर करने वाली प्रस्तुतियों के साथ प्रकाश और संगीत का संयोजन डिजिटल दुनिया के संगीत रसिकों के दिलों में उतर गया। तीसरी प्रस्तुति के साथ मुंबई से बांसुरी वादक एस आकाश संकटमोचन दरबार से जुड़े। युवा वादक एस आकाश कई वर्षों से लगातार हनुमत दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं।
बांसुरी के बाद गायक विजय कुमार पाटिल ने हनुमत दरबार में हाजिरी लगाई। धारवाड़ से किराना घराने के विजय कुमार पाटिल ने राग यमन की रचनाओं की प्रस्तुति से स्वरांजलि अर्पित की। अगली प्रस्तुति युवा दिलों की धड़कन विख्यात सितार वादक पंडित नीलाद्री कुमार मुंबई से डिजिटल मंच पर विराजमान हुए।
उन्होंने राग जय जयवंती सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चटर्जी ने किया। इसके पूर्व पांचवीं निशा की देर रात की प्रस्तुति में अजय पोहनकर ने स्वरांजलि अर्पित की। इसके बाद दिल्ली से महताब अली नियाजी ने सितार के तार छेड़े।
संकटमोचन संगीत समारोह में विख्यात सितार वादक पंडित नीलाद्री कुमार ।
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शृंखला को आगे बढ़ाते हुए जयपुर घराने की प्राची शाह पंड्या मुंबई से जुड़ीं। उन्होंने कथक नृत्य से हनुमान जी की वंदना की। तत्पश्चात दिल्ली से अभय रुस्तम सोपोरी ने संतूर के तारों पर रागिनियों की अवतारणा की। इसी क्रम में बनारस घराने के पं. नरेंद्र मिश्र ने अपने पुत्र पं. अमरेंद्र मिश्र केसाथ सितार वादन पेश किया।
पं. पूरण महाराज ने तबले पर संगत की। हैदराबाद से पद्मश्री यल्ला वेंकटेश्वर राव ने मृदंगम की तान छेड़ी। इसके बाद मुंबई से कंकना बनर्जी मुंबई से आनलाइन मंच पर पधारीं। वहीं सरोद वादन से पं. विकास महाराज ने उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद पं. सुखदेव प्रसाद मिश्र ने वायलिन वादन प्रस्तुत किया। पद्मभूषण पं. अजय चक्रवर्ती के गायन से पांचवीं निशा का समापन हुआ।
तत्पश्चात गायन की प्रस्तुति हेतु नई दिल्ली से हमारे साथ जुड़े पद्मभूषण से सम्मानित पंडित राजन साजन मिश्र। पंडित राजन साजन मिश्र जिन्हें हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का सूरज और चांद कहा जाता है, जो प्रतिवर्ष अपने स्वरों से हनुमान जी महाराज के चरणों को पखारते हैं उन्होंने इस वर्ष नई दिल्ली से डिजिटल माध्यम की सहायता से अपनी हाज़िरी लगाई। उन्होंने अपने पुत्र श्री रितेश मिश्र, श्री रजनीश मिश्र एवं श्री स्वरांश मिश्र के साथ मिलकर हाज़िरी लगाई। राग मालकौंस में प्रस्तुति दी।