अंतरराष्ट्रीय पटल पर ख्यातिलब्ध संकटमोचन संगीत समारोह छह अप्रैल से शुरू हो रहा है। देश-विदेश के कलाकार हनुमत दरबार में हाजिरी लगाएंगे। वहीं, सुर, लय व ताल की रसधार के साथ मानस पट को स्मृतियों से लेकर प्रभु वंदन के लिए कला दीर्घा भी सजेगी, जो हनुमत प्रभु को समर्पित रहेगी।
संयोजक डॉ. बीएन मिश्र ने बताया कि कला दीर्घा में चित्रकला, मूर्तिकला, रामनगर रामलीला के मुखौटे, छायाचित्र और साहित्य का संगम दिखेगा। लोग छह दिनों तक संगीत के साथ हनुमान जी के विविध रूपों का दर्शन करेंगे।
प्रख्यात कलाकार अनिल शर्मा ने बताया कि देसी-विदेशी 25 कला साधक भी अपनी पेंटिंग और मूर्ति कला को प्रदर्शित करेंगे। इसमें तेहरान के कलाकार भी होंगे। उन्होंने बताया कि दंडपाणि भैरव के चित्र भी लगाए जाएंगे, जिनमें काशी में उनके आगमन को दर्शाया जाएगा।
अनिल शर्मा ने बताया कि अतिथि कलाकार के रूप में इटली, स्पेन, अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस सहित करीब 15 देशों के चित्रकारों के श्रीराम दरबार, हनुमान जी आदि पर आधारित चित्र आ गए हैं, जिन्हें दीर्घा में प्रदर्शित किया जाएगा। प्रख्यात फोटोग्राफर मनीष खत्री ने बताया कि करीब 50 ऐसे छायाचित्र होंगे, जो प्रभु श्रीराम और हनुमान जी को दर्शाते हुए रामलीलाओं के पात्रों के भी होंगे।
डिजिटलाइज हनुमान जी की झांकी श्रीराम दरबार बना सेल्फी पॉइंट
कला दीर्घा में विविधता दिखेगी। इस बार भक्त डिजिटल हनुमान जी के विविध रूपों की झांकी के जरिए दर्शन कर सकेंगे। डॉ. बीएन मिश्र ने बताया कि हनुमान जी ध्यान मुद्रा में, भजन करते हुए, लंका दहन, राम-लक्ष्मण को कंधे पर बैठाकर ले जाते आदि मुद्राओं में पूरे परिसर में कटआउट लगाए जाएंगे। श्रीराम दरबार का सेल्फी पॉइंट बनाया जाएगा।
4 पुस्तकों का लोकार्पण व 20 साहित्यकार करेंगे संवाद
संकटमोचन के आंगन में साहित्य भी दिखेगा। साहित्यकार व्योमेश शुक्ल ने बताया कि पहले दिन गायिका मालिनी अवस्थी की पुस्तक ‘चंदन किवाड़’, दूसरे दिन व्योमेश शुक्ल की ‘नागरी’, ‘भक्ति का लोकवृत्त’ और तीसरे दिन श्रीप्रकाश शुक्ल की ‘रविदास की कविताई’ तथा चौथे दिन डॉ. बीएन मिश्र व यतींद्रनाथ चतुर्वेदी की पुस्तक ‘दंडपाणि च भैरवम्’ का लोकार्पण और इस पर चर्चा होगी। अंतिम दो दिन ‘काशी में भक्ति’ और ‘साहित्य और कला—एक अंत:संबंध’ पर संवाद होगा। डॉ. महेंद्र कुशवाहा, डॉ. विंध्यांचल यादव, डॉ. प्रीति त्रिपाठी, प्रो. सुरेंद्र प्रताप, प्रो. प्रभाकर सिंह, प्रो. मदनलाल गुप्ता सहित 20 साहित्यकार जुटेंगे।