अनूप जलोटा ने भी दी खास प्रस्तुति।
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भविष्य में हर तरह की सेवा के लिए हाजिर रहूंगी
संकट मोचन संगीत समारोह में पंडित जसराज की बेटी दुर्गा जसराज पहुंचीं। उन्होंने कहा कि संकट मोचन मंदिर में जहां पर बापू जी रहते थे, वह कमरा जाकर देखी। पुरानी यादें ताजा हो गईं। कहा कि संगीत प्रेमी और महंत जी में ये विश्वास दिखता है कि इतने बड़े कलाकार पं. उल्हास कसालकर के बाद मुंबई के मेहताब अली नियाजी को मंच दिया गया। अब इन युवा कलाकारों को आशीर्वाद देने का समय है।
हमारे पिता को यहीं का आशीर्वाद लगा। उन्होंने कहा कि महंत जी ने मुझे डांटकर कहा कि तुम्हें निर्देश दे रहा हूं कि आना ही होगा। मेरे पिताजी ने बड़ी सेवा की है। भविष्य में हर तरह की सेवा के लिए हाजिर रहूंगी। इस दौरान वह काफी भावुक हो उठी।
पं. उल्हास, तबला पर संगत करते पं सुरेश, संवादिनी पर पं. विनय मिश्र।
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सवाल उन्हीं पर उठते हैं जिनकी चर्चा होती है : अनूप जलोटा
गायक पंडित अनूप जलोटा ने कहा कि जिसकी चर्चा होती है सवाल भी उसी पर खड़े होते हैं। सनातन धर्म संस्कृति को लेकर भी आजकल कुछ ऐसा ही चल रहा है। इसलिए आजकल ये वायरल मटेरियल है। अनूप जलोटा ने कहा कि अभद्र गीतों पर सरकार को कड़ाईपूर्वक रोक लगानी चाहिए।
युवाओं को संगीत से जोड़ने की बात पर कहा कि शास्त्रीय संगीत का पूरा ज्ञान नहीं है तो भी आप अच्छे गायक बन सकते हैं। मैं छोटा-बड़ा कोई खयाल या ध्रुपद गायकी नहीं करता। कभी सुना है क्या, लेकिन गजलों के बीच-बीच में कभी इस्तेमाल कर लेता हूं। क्या मेरे गाने नहीं सुने जा रहे।
उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि पूरा संगीत आप सीखें, लेकिन जो सीखें उसमें पक्के हो जाएं। ऐसे ही युवाओं को संगीत से जोड़ा जा सकता है। संगीत समारोह में लगातार 25 साल से आ रहा हूं और अगले 25 साल तक आऊंगा। युवाओं को जोड़ने का काम आगे भी किया जाएगा। संगीत सीखना जरूरी है। रियाज जरूरी है।