दर्शकों ने कलाकारों के मंचन को सराहा।
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जब दर्शकों ने की डिमांड
इसके बाद चलनचारी में विलंबित से लेकर द्रुत गति के बाद पाट पेश किया। इसमें चार लय बराबर, सवाई, झूलना, रेला का समन्वय सुधि श्रोताओं का मन मोह गया। बाल कलाकार ने जनता की मांग पर टुकड़ा, तिहाई पेश किया।
इसके बाद अंत में बनारस के दिग्गज पं. राम सहाय के भतीजे पं. भैरव सहाय, उनके बेटे पं. बलदेव सहाय, कंठे महाराज और पं. सामता प्रसाद, पं. गुदई महाराज, पं. किशन महाराज, पं. शारदा सहाय, पं. नंदन मेहता और अपने पिता पूरन महाराज का टुकड़ा पेश किया। दूसरी प्रस्तुति का समापन अवंतिका ने श्रीराम परन से किया। पंजाब के पं. विनायक सहाय ने सारंगी पर लहरा दिया। मंच संचालन साधना श्रीवास्तव व व्यामेश शुक्ल ने किया।