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संकटमोचन संगीत समारोह: चार साल में 12 से 31 लाख हुए संगीत समारोह के मुरिद, जानें- इसकी अन्य विशेषताएं

Fri, 26 Apr 2024 05:15 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: छह दिवसीय संकटमोचन मोचन संगीत समारोह 27 से शुरू हो रहा है, जो एक शताब्दी को पार कर जाएगा। यहां प्रवाहमान होते संगीत के मुरीद देश-विदेश तक हैं। 2020 में संगीत समारोह का 97वां संस्करण डिजिटल कराया गया था। तबसे ऑनलाइन की भी सुविधा शुरू हो गई थी। 
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संकटमोचन संगीत समारोह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना काल में धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में जहां पूजन, अर्चन व सांगीतिक कार्यक्रमों पर लगाम लग गया था, वहीं संकटमोचन संगीत समारोह ऑनलाइन ही कायम रहा। 

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तब से यानी चार सालों में ऑनलाइन ही तीन गुना संगीत रसिकों की तादाद बढ़ गई। इन चार सालों में देश-विदेश के 87 लाख ने हनुमत दरबार में हुए संगीत से आनंदित हुए। पिछले साल सबसे ज्यादा 31 लाख ने देखा था।

देश-विदेश के नामचीन कलाकारों व दर्शकों ने वर्चुअल ही जुड़कर संगीत की संगीत को प्रवाहमान बनाए रखे। खास बात ये है कि ऑनलाइन पंडित जसराज ने भी अमेरिका के न्यू जर्सी शहर से प्रस्तुति दी थी। जो 1974 से लगातार हनुमान दरबार में हाजिरी लगाते रहे। 2020 में 12 लाख जुड़े थे। इसके बाद लगातार बढ़ते गए।
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2021 में 18 लाख, 2022 में 26 लाख हो गए तो पिछले साल 31 लाख दर्शकों ने संगीत समारोह को देखा। संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने बताया कि कोरोना के बाद संगीत समारोह मंदिर में शुरू हुआ। मगर ऑनलाइन सुविधा बंद नहीं की गई। इसे और बढ़ाया गया। ऑफलाइन से ज्यादा ऑनलाइन दर्शक जुड़ते हैं। समारोह के दौरान रोज एक लाख से अधिक दर्शक पहुंचते हैं।

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आता है बाहर से अनुरोध

संकटमोचन संगीत समारोह वैश्विक हो चुका है। हनुमत दरबार में हाजिरी लगाने वालों और समारोह का चाहने वाले ऑनलाइन प्रसारण करवाने का अनुरोध भी करते हैं। इस समारोह से लाखों लोग जुड़ते हैं।

न कार्ड न न्योता फिर भी पहुंचते हैं हजारों
संकट मोचन मंदिर में संगीत समारोह के सौ साल हो गए हैं। इसकी खासियत है कि न कोई कार्ड छपता है और न किसी के न्योता दी जाती है। फिर भी हजारों की तादाद में आस्तिक और नास्तिक भी संगीत सुनने आते हैं। महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने बताया कि इस समारोह का एक और खास बात है कि इसके कोई अध्यक्ष और अतिथि भी नहीं होते हैं। आम व खास का भी बंधन नहीं होता है। हनुमत प्रभु ही इसके सबकुछ होते हैं।

देश शीर्ष कलाकार लगा चुके हैं हाजिरी
संकटमोचन संगीत समारोह में देश के शीर्ष कलाकार भी हाजिरी लगा चुके हैं। पं. रविशंकर मिश्र, गोदई महाराज, पं. जयराज, पं. किशन महाराज, शिवकुमार शर्मा, अमजद अली खां, गुलाम अली सहित हजारों कलाकारों ने हाजिरी लगाई है। इस संगीत समारोह में हाजिरी लगाने के लिए हर कलाकार आतुर रहते हैं।

पं. अमरनाथ ने रखी थी नींव
संकट मोचन मंदिर के महंत पं. अमरनाथ मिश्र ने संकट मोचन संगीत समारोह की नींव 1923 में रखी थी। तब स्थानीय कलाकार ही भाग लेते थे। प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने बताया कि धीरे-धीरे इसकी ख्याति बढ़ने लगी। इसके बाद देश-विदेश के कलाकारों के अलावा दर्शक भी जुड़ने लगे। अब यह संगीत का लोकपर्व बन गया है।

राजोपचार से शुरू होता है सगीत समारोह
हनुमान जयंती पर राजोपचार पूजन होता है। इस पूजन विधि में संगीत भी आता है। पं. स्वर्ण प्रताप चतुर्वेदी ने बताया कि राजोपचार पूजन के तहत ही वेद, मानस, अखंड रामायण, मानस सम्मेलन के साथ संगीत भी शामिल है। इससे प्रभु आनंदित होते हैं। रामायण व मानस पाठ चैती शैली में खासकर प्रभु को सुनाया जाता है।
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