संकटमोचन संगीत समारोह वैश्विक हो चुका है। हनुमत दरबार में हाजिरी लगाने वालों और समारोह का चाहने वाले ऑनलाइन प्रसारण करवाने का अनुरोध भी करते हैं। इस समारोह से लाखों लोग जुड़ते हैं।
न कार्ड न न्योता फिर भी पहुंचते हैं हजारों
संकट मोचन मंदिर में संगीत समारोह के सौ साल हो गए हैं। इसकी खासियत है कि न कोई कार्ड छपता है और न किसी के न्योता दी जाती है। फिर भी हजारों की तादाद में आस्तिक और नास्तिक भी संगीत सुनने आते हैं। महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने बताया कि इस समारोह का एक और खास बात है कि इसके कोई अध्यक्ष और अतिथि भी नहीं होते हैं। आम व खास का भी बंधन नहीं होता है। हनुमत प्रभु ही इसके सबकुछ होते हैं।
देश शीर्ष कलाकार लगा चुके हैं हाजिरी
संकटमोचन संगीत समारोह में देश के शीर्ष कलाकार भी हाजिरी लगा चुके हैं। पं. रविशंकर मिश्र, गोदई महाराज, पं. जयराज, पं. किशन महाराज, शिवकुमार शर्मा, अमजद अली खां, गुलाम अली सहित हजारों कलाकारों ने हाजिरी लगाई है। इस संगीत समारोह में हाजिरी लगाने के लिए हर कलाकार आतुर रहते हैं।
पं. अमरनाथ ने रखी थी नींव
संकट मोचन मंदिर के महंत पं. अमरनाथ मिश्र ने संकट मोचन संगीत समारोह की नींव 1923 में रखी थी। तब स्थानीय कलाकार ही भाग लेते थे। प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने बताया कि धीरे-धीरे इसकी ख्याति बढ़ने लगी। इसके बाद देश-विदेश के कलाकारों के अलावा दर्शक भी जुड़ने लगे। अब यह संगीत का लोकपर्व बन गया है।
राजोपचार से शुरू होता है सगीत समारोह
हनुमान जयंती पर राजोपचार पूजन होता है। इस पूजन विधि में संगीत भी आता है। पं. स्वर्ण प्रताप चतुर्वेदी ने बताया कि राजोपचार पूजन के तहत ही वेद, मानस, अखंड रामायण, मानस सम्मेलन के साथ संगीत भी शामिल है। इससे प्रभु आनंदित होते हैं। रामायण व मानस पाठ चैती शैली में खासकर प्रभु को सुनाया जाता है।