सत्तर के दशक के फिल्मी नगमों से रविवार की शाम गूंज उठी। चाहूंगा मैं तुझे सांझ -सवेरे....क्या हुआ तेरा वादा...बेखुदी में सनम ... तुम मुझे यूं भुला न पाओगे...जैसे कर्णप्रिय गीतों पर लोग झूमते-थिरकते नजर आए। नागरी नाटक मंडली के मुरारी लाल मेहता प्रेक्षागृह में यह निशा मुहम्मद रफी को समर्पित थी।
शुरुआत हुई ताहिर वारसी के स्वरों में रफी के नगमों से। शिरडी वाले साईं बाबा...के बाद शहनवाज खान ने याद ना जाए बीते दिनों की... पेश किया। कुमार अभिषेक ने -तुम मुझे यूं भूला ना पाओगे...और मनीष,स्नेहा ने -बेखुदी में सनम... को सुरों से सजाकर वाहवाही लूटी। किरण मिश्रा ने -क्या हुआ तेरा वादा ... गीत पेश किया तो सौरभ मिश्रा ने -चाहूंगा तुझे मैं सांझ -सबेरे... की प्रस्तुति की।
ताहिर एवं मिली ने -वादा करले साजना... पेश कर खूब तालियां बटोरीं। प्रस्तुति के अगले दौर में सिद्धार्थ भट्टाचार्या ने -मधुबन में राधिका नाची रे..और शमशेर अहमद ने -रंग और नूर की बारात.. पेश किया। कुमार अभिषेक एवं आराधना ने रिमझिम के गीत सावन गाए ...की प्रस्तुति की तो मनीष शर्मा ने -दर्द -ए -दिल, दर्द -ए- जिगर... पेश किया। ताहिर एवं अंजलि गुप्ता, वैभव मिश्रा, करन मिश्रा, आदित्य अग्रहरि, पीयूष मिश्रा, भूपेंद्र सिंह ने एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति की।
मुहम्मद रफी को नृत्य के जरिए भी याद किया गया। अनुराधा ने गीत -नाचे मन मोरा...पर नृत्य पेश किया। इससे पहले आबिद जमाल एवं साथी कलाकारों ने सुरगंगा थीम सांग की प्रस्तुति की। संचालन जगदीश्वरी चौबे, घनश्याम सेठ, उत्कर्ष सहस्त्रबुद्धे एवं नेहा गुप्ता ने किया।