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आस्था: चारों वेदों के मंत्रों की होगी रिकॉर्डिंग, सुरेश वाडेकर देंगे स्वर; संस्कृत विश्वविद्यालय करेगा एमओयू

Sat, 20 Dec 2025 10:05 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने चारों वेदों के संरक्षण का कार्य शुरू कर दिया है। श्रुतिनि: स्वन: कार्यक्रम के तहत चारों वेदों का संरक्षण हुआ। अब चारों वेदों के मंत्रों का डिजिटल स्वरूप होगा। 
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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चारों वेदों के मूलपाठ को संरक्षित करने का कार्य संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने शुरू कर दिया। मुंबई में चारों वेदों के मूलपाठ की रिकॉर्डिंग की जा रही है। इसे बॉलीवुड के मशहूर गायक सुरेश वाडेकर की आवाज में रिकॉर्ड किया जा रहा है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय विंग्स मनोरंजन लिमिटेड स्टूडियो, मुंबई/दुबई और यूट्यूब चैनल भजन इंडिया के साथ एमओयू करेगा।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वेद विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विजय कुमार शर्मा के संयोजकत्व में श्रुतिनि:स्वन: कार्यक्रम के अंतर्गत चारों वेदों के मूलपाठ का संरक्षण किया गया। वेदों की यह मौखिक परंपरा पूरे विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के प्रयास से एमओयू कर प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडेकर के स्वर और निर्देशन में डॉ. विजय कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में चारों वेदों के मंत्रों की रिकॉर्डिंग कर विश्व पटल पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के निर्देशानुसार 15 से 18 दिसंबर तक डॉ. विजय कुमार शर्मा ने विंग्स मनोरंजन लिमिटेड स्टूडियो के संस्थापक पंकज रोहरा और सुरेश वाडेकर के साथ मुलाकात कर चर्चा की है। चर्चा के बाद कुछ मंत्रों की रिकॉर्डिंग भी की गई है। शीघ्र ही आगामी माह में करार (एमओयू) कर आगे की कार्यवाही पूरी की जाएगी। कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार के महनीय कार्यों को करने के लिए पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया गया है। वेदों का संरक्षण इसी विधि से प्रसारित कर जन-जन तक जोड़ा जा सकता है। आज इसी कड़ी में यह प्रयास किया जा रहा है, अनवरत चलता रहेगा।
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1131 शाखाएं थीं वेदों की, आज बची हैं 13 शाखाएं

वेद भारतीय संस्कृति के सर्वप्राचीन एवं प्राणि-मात्र के कल्याणकारी ग्रंथ हैं। किसी समय वेदों की 1131 शाखाएं प्रचलन में थीं, लेकिन अध्ययन-अध्यापन के अभाव में सर्वाधिक शाखाएं लुप्त होकर आज चारों वेदों की मात्र 13 शाखाएं ही बची हैं। वेदों की मौखिक परंपरा का जो स्वरूप प्राचीन काल में था आज भी उच्चारण का वही स्वरूप यथावत उपलब्ध होता है, इसीलिए ऋग्वेद को यूनेस्को ने विश्व धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की है।
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वेदों का संरक्षण कर रहा विश्वविद्यालय

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने वैदिक वांग्मय तथा संस्कृत वांग्मय के भाष्यों के अध्ययन-अध्यापन के साथ साथ वेदों की सस्वर मौखिक परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अंतर्गत वेद विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विजय कुमार शर्मा के संयोजकत्व में श्रुतिनि:स्वन: कार्यक्रम के अंतर्गत चारों वेदों के मूलपाठ का संरक्षण किया गया है।
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