संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्थापक डॉ. संपूर्णानंद की 133वीं जयंती को संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान कुलपति समेत अन्य वक्ताओं ने उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों पर चर्चा की। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि डॉ. संपूर्णानंद ने साहित्य, कला और संस्कृति को नई दिशा देने का काम किया है।
योग साधना केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि डॉ. संपूर्णानंद का अध्यापन के साथ ही स्वाध्याय पर भी ध्यान था। उनके विचारों के अनुरूप अपने जीवन को ढालने की जरूरत है। इसके पहले विश्वविद्यालय परिसर में डॉ. संपूर्णानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनको याद किया गया। कार्यक्रम में प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन पांडेय, डॉ. मधुसूदन मिश्र, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी मौजूद रहे।