वाराणसी। करपात्र प्राकट्योत्सव के अवसर पर दिए जाने वाले करपात्र रत्न एवं करपात्र गौरव सम्मान की घोषणा बुधवार को कर दी गई। पुरस्कारों के वितरण के लिए आयोजित विद्वानों की बैठक में प्रो. रामचंद्र पांडेय को करपात्र रत्न सम्मान और पं. व्यास नंदन शास्त्री को करपात्र गौरव देने के नाम पर मुहर लगी। करपात्र रत्न सम्मान के तहत एक लाख रुपये का पुरस्कार, दुशाला, श्रीफल और प्रशस्तिपत्र तथा करपात्र गौरव के लिए 11 हजार रुपये की धनराशि दी जाती है। यह सम्मान दो अगस्त को करपात्र प्राकट्योत्सव के अवसर पर दिया जाएगा। उक्त जानकारी धर्म संघ शिक्षा मंडल के महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने दी।
उन्होंने बताया कि प्रो. रामचंद्र पांडेय काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वह राष्ट्रपति पदक से सम्मानित और भारत सरकार की पंचांग सुधार समिति तथा ज्योर्तिविज्ञान पाठ्यक्रम सलाहकार समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। 10 से अधिक पुस्तकों का लेखन व संपादन कर चुके प्रो. पांडेय पूर्व में जगदगुरु रामानंदाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर में सवाई जयसिंह पीठ के आचार्य पद पर भी रहे हैं। वहीं करपात्र गौरव के लिए चयनित विद्वान वृंदावन निवासी पं. व्यास नंदन शास्त्री धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज के शिष्यों में से एक हैं। श्रीमद्भागवत के जानकार पं. शास्त्री को भागवत के 18 हजार श्लोक कंठस्थ हैं।