उन्होंने कहा कि बीएचयू में कार्यरत लगभग 70 कार्यालय सहायकों की नियुक्ति विश्वविद्यालय सेवा में सत्र 2012-13 में प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर हुई थी। इनका आंकलन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा, कम्प्यूटर टाईपिंग एवं साक्षात्कार में उत्तीर्ण होने के बाद कनिष्ठ लिपिकों के रिक्त पदों के सापेक्ष किया गया था। समाचार पत्र एवं विश्वविद्यालय की वेबसाईट पर विज्ञप्ति जारी की गई थी।
परीक्षा में लगभग 6000 से ज्यादा परीक्षार्थी सम्मिलित हुए थे। बीएचयू प्रशासन ने चयन एवं आंकलन प्रकोष्ठ द्वारा कनिष्ठ लिपिक के रिक्त पदों पर नियुक्त कार्यालय सहायकों के विनियमितिकरण नहीं किया। जिससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कनिष्ठ लिपिक परीक्षा में घोर धांधली की है। किसी कार्यालय सहायक के जीवन का मूल्य भी नहीं समझा है। कोरोना काल में ये लगातार सेवा दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में इनका समायोजन किया जाए।