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काशी पहुंचे मोरारी बापू: विश्वनाथ धाम में दर्शन कर बोले- बाबा का दरबार अद्भुत, मन गदगद हो गया

Sat, 14 Jun 2025 01:28 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

संत मोरारी बापू शनिवार को बाबा विश्वनाथ धाम पहुंचे। यहां दर्शन पूजन करने के लिए उनका आगमन हुआ। बाबा का दर्शन करने के बाद उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि बाबा के दर्शन का अवसर मिला। 
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विश्वनाथ धाम पहुंचे मोरारी बापू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रामकथा वाचक संत मोरारी बापू शनिवार को धर्मनगरी काशी पहुंचे। दोपहर में बाबा श्री काशी विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। इस दौरान मोरारी बापू ने विधिवत पूजा-अर्चना कर बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। बाबा के नव्य-भव्य धाम की भव्यता को निहारते हुए उन्होंने कहा कि बाबा का दरबार अद्भुत है। यहां आकर मन आत्मविभोर हो गया। जो भी यहां आता है, वह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है
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विश्वनाथ कॉरिडोर की भव्यता से अभिभूत मोरारी बापू ने कहा कि यह सिर्फ कॉरिडोर नहीं, बल्कि सनातन आस्था का विराट स्वरूप है। उन्होंने कहा कि "मेरा यह सौभाग्य है कि मुझे बाबा का साक्षात दर्शन प्राप्त हुआ और मुझे काशी में कथा कहने का भी अवसर मिल रहा है। यह मेरे जीवन की सबसे पावन अनुभूतियों में से एक है।"

मोरारी बापू के आगमन पर श्रद्धालुओं और उनके अनुयायियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। विश्वनाथ धाम परिसर में उनके पहुंचते ही भक्ति और श्रद्धा का वातावरण और भी दिव्य हो गया। काशी के संतों और श्रद्धालुओं ने मोरारी बापू का पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ स्वागत किया।
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बापू ने काशी को आत्मा की नगरी बताते हुए कहा कि यहां कथा कहना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक साधना है। यह नगरी हर कथावाचक के लिए सपना है और मेरा यह सपना आज साकार हो गया।

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काशी में आज मोरारी बापू की 958वीं रामकथा सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में शुरू हो रही है। 22 जून तक चलने वाली रामकथा में ऑपरेशन सिंदूर से प्रेरित होकर मोरारी बापू ने कथा का शीर्षक मानस सिंदूर रखा है। कथा का शुभारंभ आज शाम चार बजे होगा। इसके बाद 15 जून से 22 जून तक कथा सुबह दस बजे से होगी। कथा का सजीव प्रसारण यूट्यूब के माध्यम से विश्व के 170 देशों में किया जाएगा।

कथा में देश के विभिन्न प्रांतों के साथ साथ विदेशों से भी श्रोता शामिल होंगे। कथा स्थल के समीप प्रभु प्रसाद (खुला भंडारा) सभी श्रोताओं के लिए उपलब्ध रहेगा। कथा का आयोजन सेठ दीनदयाल जालान सेवा ट्रस्ट की ओर से किया जा रहा है। 
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