जोधपुर के मानक दास महाराज, मंदसौर के प्राचार्य पृथ्वीराज परमार, दिनेश दास आदि संतों ने विचार रखे। बिहार समस्तीपुर के कलाकारों और कबीरपंथियों ने भजन और कीर्तन कबीर की लोक परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। महोत्सव में 29 जून को प्रदेश के राज्यमंत्री असीम अरुण, रवींद्र जायसवाल, हंसराज विश्वकर्मा सहित जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
इस मौके पर इग्नू के ज्ञानवाणी दिल्ली के डॉ. मनोज कुमार सिंह, धर्मदास, महंत त्रिलोक दास महराज, शैलेश वर्णवाल, मुरली साहू, प्रेम चन्द बामनिया, डॉ. मानसिंह रहे। वहीं, कबीर साहेब की कर्म स्थली कबीरचौरा मूलगादी मठ में भी तीन दिवसीय प्राकट्योत्सव शुरू हो गया।
स्वर्वेद महामंदिर में आज से गूंजेगी कबीरवाणी
चौबेपुर स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम में 28 और 29 जून को दो दिवसीय सद्गुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव मनाया जाएगा। इसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं शामिल होंगे। शनिवार को देर रात तक विहंगम योग के अनुयायी उमरहां स्थित स्वर्वेद महामंदिर पहुंचने लगे। महोत्सव में प्रतिदिन शाम छह बजे से संत प्रवर विज्ञानदेव महाराज की दिव्यवाणी ‘जय स्वर्वेद कथा’ होगी। कबीर के ज्ञान, भक्ति और मानवता के संदेशों का विवेचन होगा। 29 को सद्गुरु आचार्य स्वतंत्रदेव महाराज का प्रवचन होगा।
किसी बंधन में नहीं बंध सकते साधक: पंथश्री हजूर
वाराणसी। कबीरधारा के अनुयायियों ज्ञान कोई बंधन नहीं बांध, नहीं सकता। यह सद्गुरु कबीर साहेब अमर ज्ञान है। उनके प्राकट्य स्वरुप के उपकार को स्मरण कर लेना ही सच्ची भक्ति की पहचान है। सद्गुरु कबीर प्राकट्यधाम लहरतारा तालाब और स्मारक विकास समिति की ओर से तीन दिवसीय प्राकट्यमहोत्सव का शुभारंभ सत्यनाम से अंकित ध्वजारोहण से हुआ।
नादवंशाचार्य पंथश्री हजूर अर्धनाम साहेब के सान्निध्य में सद्गुरु कबीर साहेब के मूर्ति पर पुष्प, माला तथा चादर चढ़ाकर पूजा और आरती हुई। सद्गुरु की भक्ति सहज है। सहजता के मर्म को हर कोई नहीं समझता, जो लोग स्वाभाविक रूप से सांसारिक विषयों (मोह-माया और विकारों) को त्याग देते हैं, असली सहजता वही कहलाती है। संत अनुपम ने भजन पेश किया। महंत राधेश्याम शास्त्री, मनभंग दास शास्त्री, सुनील दास शास्त्री ने भी विचार रखे। इस मौके पर मंजू सत्य प्रकाश, कालूराम, सुरेश, सुधीर, भगवत सिंह, ज्ञान सत्यप्रकाश, केशव रहे।