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BHU: साधु ने बेच दी चादर...भिखारी और चरवाहे ने भी दिया दान; महामना के आह्वान पर पाकिस्तान से भी आगे आए दानदाता

Wed, 14 Feb 2024 12:30 PM IST
शाहरुख खान रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बीएचयू स्थापना के लिए साधु ने चादर बेच दी थी। भिखारी और चरवाहे ने भी दान दिया था। महामना के आह्वान पर भारत के साथ पाकिस्तान के लाहौर से भी दानदाता आगे आए। यूपी-एमपी, बिहार, दरभंगा, कोलकाता, अमृतसर से चंदे की राशि मिली थी।
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महामना की एक अपील पर बरस गया था धन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू की स्थापना के लिए महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने धन जुटाने के लिए आम जनता से अपील की। 15 जुलाई 1911 को जारी अपील में महामना ने एक लाख रुपये से लेकर 10 रुपये तक के लिए चंदा देने का प्रस्ताव रखा। 
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इस अपील का असर यह हुआ कि बड़े दानदाताओं ने तो दान दिया ही, भिखारियों और साधु संन्यासियों ने अपने सामर्थ्य के अनुसार इस दान बाती आहुति दी। इसमें एक साधु ने लोगों से मिले चादर को 500 रुपये में बेचकर दान दिया। इसके अलावा भिखारी और 80 साल की महिला ने एक रुपये और चरवाहा ने आठ आना दान में दिया।

विश्वविद्यालय की स्थापना चार फरवरी 1916 को हुई। इससे पहले एक अक्तूबर 1915 को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी विधेयक पारित हुआ। महामना ने स्थापना के पांच साल पहले विश्वविद्यालय के लिए एक करोड़ रुपये के चंदे की अपील की। इससे हिंदू विश्वविद्यालय नाम से सोसाइटी के गठन सहित अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी थी। 
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इसमें महामना की एक खास अपील ये थी कि चंदा कम हो या अधिक, सभी राशियां स्वीकार की जाएंगी और इसका रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के कोष में प्रथम दाताओं के रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। इसके बाद से राजा, महाराजा, डॉक्टर, शिक्षक, पुरोहित, सेठ ने बीएचयू के लिए सहयोग दिया ही छात्रों ने भी अपना अमूल्य योगदान किया। यही नहीं भिखारी से लेकर साधु, सामान्य लोगों ने भी एक आने तक की राशि दान में दी।
 

यूपी, बिहार, लाहौर, अमृतसर समेत अन्य जगहों पर हुई सभाएं
विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जरूरी धनराशि मिल जाए और कोई अड़चन न आए, इसके लिए महामना के नेतृत्व में अलग-अलग समितियों का गठन किया गया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों ने देश के विभिन्न जगहों पर सभाएं कर लोगों से चंदा देने के लिए सहयोग का आश्वासन किया। इसमें यूपी में फैजाबाद, गोरखपुर, कानपुर, जौनपुर, लखनऊ के साथ ही बिहार के मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर के साथ ही लाहौर, अमृतसर, रावलपिंडी, कोलकाता, फरीदपुर में प्रतिनिधिमंडल ने दौरा किया।

स्थापना के लिए यह थी महामना की अपील
एक लाख रुपये या उससे अधिक : 20 चंदा
50000 रुपये या उससे अधिक : 10 चंदा
20000 रुपये या उससे अधिक : 50 चंदा
10000 रुपये व उससे अधिक : 100 चंदा
5000 रुपये व उससे अधिक : 200 चंदा
2000 रुपये व उससे अधिक : 500 चंदा
1000 रुपये व उससे अधिक : 1000 चंदा
500 रुपये व उससे अधिक : 2000 चंदा
100 रुपये व उससे अधिक : 10000 चंदा
10 रुपये व उससे अधिक : 50000 चंदा
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विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए महामना ने हर वर्ग के लोगों को साथ जोड़कर अपने संकल्पों को पूरा किया। वर्तमान समय में काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिवार से जुड़े सभी सदस्यों को महामना के जीवन आदर्शों का अनुसरण करते हुए उनके बताएं मार्ग पर चलकर महामना के सपनों को साकार करना होगा। - न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय, चांसलर बीएचयू व प्रपौत्र, महामना मदन मोहन मालवीय।
 
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