स्वतंत्रता आंदोलन सार्वदेशिक और सर्वसमावेशी था, लेकिन कई तथ्य सामने नहीं आए, दब गए। स्वतंत्रता सेनानियों ने संगठित, संपन्न भारत का स्वप्न देखा था, उसे साकार रूप देने का कार्य वर्तमान पीढ़ी को करना चाहिए, इस दृष्टि से विभिन्न कार्यक्रम हमने लिए हैं।
संघ प्रमुख ने शाखा में शामिल होने वाले लोगों के प्रशिक्षण पर जोर देते हुए शताब्दी वर्ष 2025 से पहले संघ के प्रमुख सात आयामों को परिपूर्ण करने का लक्ष्य रखा और आगामी तीन वर्ष में धर्मजागरण, परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, सामाजिक सद्भाव, गो संवर्धन, ग्राम विकास, जल व पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों की कार्ययोजना भी बताई।
जागरण श्रेणी और पूर्व प्रांत संगठन श्रेणी के स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि दो क्षेत्रों में विशेष कार्य करने की बड़ी आवश्यकता है। शिक्षा क्षेत्र में विद्यालय बंद रहने के कारण छात्रों का विकास प्रभावित हुआ है, इसे लेकर संघ के स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं।
ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई तो हुई, लेकिन काफी कुछ छूट गया, इसकी भरपाई आवश्यक है। दूसरा कोरोना के कारण रोजगार प्रभावित हुआ है, स्वावलंबन को लेकर भी स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं। इसी के संबंध में बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया।
प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता, मानवशक्ति की विपुलता और अंतर्निहित उद्यमकौशल के चलते भारत में अपने कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों को परिवर्तित करते हुए कार्य के पर्याप्त अवसर उत्पन्न कर आत्मनिर्भर बनने की क्षमता है। इस क्षमता का सदुपयोग करने के लिए एक तरफ सरकार की योजना होनी चाहिए, साथ ही समाज की कर्मण्यता भी बढ़नी चाहिए। गुजरात के स्वयंसेवकों ने, समाज बंधुओं ने दशकों से संघ कार्य में सहयोग व सहभाग कर कार्य को सुदृढ़ किया है, उनके प्रति हम कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। संघ कार्य को अपना ही कार्य समझकर सहयोग दिया है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ।
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बीएचयू में रविवार को कुटुंब स्नेह मिलन का आयोजन किया गया है। संघ के आयाम कुटुंब प्रबोधिनी को बढ़ावा देने के लिए आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है। इस आयोजन में स्वयंसेवक अपने-अपने परिवार के साथ हिस्सा लेंगे। संघ की यह सोच है कि अगर परिवार जुड़ेगा तो सेवा का भाव और बेहतर हो जाएगा। इस दौरान सरसंघचालक परिवार को शाखा से जोड़ने के बारे में मूलमंत्र देंगे।