बिजली निगम ने काशी विद्यापीठ स्थित भारत माता मंदिर परिसर में उपकेंद्र बनाने का फैसला किया तो छात्रों ने विरोध कर दिया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बिजली निगम से जुड़े एक अफसर ने कहा कि जगह तय हुई तो उपकेंद्र बनने में करीब छह महीने लग जाएंगे, क्योंकि उपकेंद्र में 5-5 एमवीए के दो पावर ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इसके जरिये रोपवे को बिजली दी जाएगी।
निर्बाध बिजली नहीं मिली तो सुरक्षा को खतरा
रोपवे से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि निर्बाध बिजली की जरूरत है। सामान्य कनेक्शन में ट्रिपिंग होगी। इससे रोपवे का संचालन प्रभावित होगा। गंडोला केबिल पर चलेगा। निर्बाध बिजली मिलेगी तो मूवमेंट लगातार होता रहेगा और गंडोला चलता रहेगा। यदि ट्रिपिंग हुई तो किसी एक प्वाइंट पर दबाव पड़ेगा और इससे कंडक्टर प्रभावित होगा। केबिल पर कहीं एक जगह दबाव आएगा। बार-बार दबाव आया तो यह सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं होगा। इसीलिए जरूरी है कि निर्बाध बिजली मिले, जिसमें कहीं कोई ट्रिपिंग न हो।
एक साल पहले ही बिजली निगम को उपकेंद्र बनाने के लिए रथयात्रा, भारत माता मंदिर समेत चार जगहों के विकल्प दिए गए थे। तकनीकी रूप से बिजली निगम ने भारत माता मंदिर वाले स्थान को चुना। अब बनाना बिजली निगम को ही है। तकनीकी रूप से जगह वही बता सकते हैं। हम उसमें तो कुछ नहीं कर सकते हैं। कहीं कोई विरोध है तो बातचीत के जरिये रास्ता निकाला जाएगा। जल्द ही जगह फाइनल कर दी जाएगी। -कौशल राज शर्मा, कमिश्नर
जमीन और जगह को लेकर फैसला वीडीए को करना है। बिजली निगम को जगह मिल जाएगी तो आगे का काम शुरू हो जाएगा। -एके वर्मा, अधीक्षण अभियंता