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Trend: गुलाबी मीनाकारी में रोपवे से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर की रेप्लिका, सालाना 500 करोड़ का कारोबार

Fri, 26 Jun 2026 09:16 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: चांदी के रोपवे से लेकर विश्वनाथ मंदिर की रेप्लिका तक, बनारस की गुलाबी मीनाकारी में नया ट्रेंड बन गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर की 90 हजार रुपये की रेप्लिका सीएम-पीएम की भी पसंद बनी।
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रोपवे का गंडोला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी जिले में गुलाबी मीनाकारी के कारोबार का नया ट्रेंड सामने आ रहा है। मीनाकारी से जुड़े कारोबारी अब काशी की चर्चित आकृतियां बना रहे हैं। इससे उनकी हर महीने लाखों की कमाई हो रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि स्वयं पीएम और सीएम भी इस कला को पसंद कर रहे हैं। यही वजह है कि इनकी डिमांड विदेशों तक हो रही है।

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नेशनल अवॉर्डी और गुलाबी मीनाकारी के मास्टर आर्टिजन कुंज बिहारी सिंह रोपवे, काशी विश्वनाथ मंदिर, बुलडोजर समेत कई रेप्लिका बना रहे हैं। उनकी बनाई हुई काशी विश्वनाथ मंदिर की रेप्लिका सीएम योगी को भी पसंद आई थी। इसे मुख्यमंत्री कई बार प्रधानमंत्री को भेंट कर चुके हैं। 

कुंज बिहारी सिंह ने बताया कि इसे बनाने में करीब एक महीने का समय लगता है। इसमें 200 ग्राम से अधिक चांदी का इस्तेमाल होता है। इस रेप्लिका की कीमत 90 हजार रुपये है। रेप्लिका में काशी विश्वनाथ मंदिर के सामने मौजूद नंदी की भी अनुकृति आकर्षिक कर रही है। 
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इसके अलावा योग करती चांदी की आकृति भी पूर्वांचल में डिमांड है। इसे बनाने में 100 ग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है। इसकी कीमत 36 हजार रुपये है। वहीं, काशी के रोपवे और मुख्यमंत्री योगी के बुलडोजर की भी अनुकृति बनाई जा रही है।

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50 घरों में गुलाबी मीनाकारी का हो रहा कारोबार

काशी विश्वनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
जीआई एक्सपर्ट डॉ. रजनीकांत बताते हैं कि काशी में गोलघर से विशेश्वरगंज तक 50 घरों में गुलाबी मीनाकारी का सालाना 500 करोड़ से अधिक का कारोबार हो रहा है। बनारस के अलावा मीनाकारी कला भारत के कई अन्य शहरों जैसे राजस्थान के जयपुर, उदयपुर और बीकानेर में भी प्रचलित है। इसके अतिरिक्त दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में भी यह कला सीमित मात्रा में की जाती है। बनारस की मीनाकारी विशेष रूप से अपनी गुलाबी मीनाकारी के लिए प्रसिद्ध है। काशी की गुलाबी मीनाकारी को जीआई टैग भी मिला है। वहीं, प्रदेश सरकार ने इसे ओडीओपी में भी शामिल किया है।
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800 डिग्री सेल्सियस तापमान पर निखरती है चमक
कुंज बिहारी सिंह बताते हैं कि गुलाबी मीनाकारी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गुलाबी रंग गोल्ड ऑक्साइड से तैयार किया जाता है। इसे चंदन के तेल में मिलाकर अत्यंत सूक्ष्मता से लगाया जाता है। इसके बाद इसे लगभग 800 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पकाया जाता है, जिससे इसका रंग और चमक स्थायी रहती है। फारस (परिशया) से आकर काशी की मिट्टी में रची-बसी इस कला में गोल्ड ऑक्साइड और विशेष प्राकृतिक तत्वों (जैसे चंदन का तेल) का उपयोग करके गुलाबी रंग तैयार किया जाता है। उच्च तापमान वाली भट्टी में तपकर तैयार होने के कारण यह मीना धातु के ऊपर तैरता नहीं, बल्कि उसमें समा जाता है। शिल्पकारों के अनुसार, यह मीना समय के साथ शरीर की गर्मी पाकर और अधिक चमकदार होता जाता है। इस वजह से विदेशी खरीदार इसके मुरीद हैं। विदेशी बाजारों की मांग के अनुसार अब पारंपरिक गहनों के अलावा आधुनिक वेस्टर्न वियर के साथ पहनने योग्य फ्यूजन ज्वेलरी, पेंडेंट और ईयररिंग्स भी बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट हो रही है।
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