लगभग 45 से 50 मीटर की ऊंचाई से करीब 148 ट्रॉली कार चलेगी। एक ट्रॉली में 10 पैसेंजर सवार हो सकते हैं। दूसरे सेक्शन रथयात्रा से गोदौलिया तक सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। गोदौलिया पर एक तरफ पिलर तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है और अगले पंद्रह दिन में पिलर का काम पूरा हो जाएगा।
रथयात्रा होगी गंडोला की पार्किंग, सौर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा : पूरे दिन चलने के बाद जब रोपवे का संचालन बंद किया जाएगा तो सभी गंडोला रथयात्रा पर पार्क किए जाएंगे। इसकी पार्किंग रथयात्रा पर तैयार की जा रही है। वहीं, गंडोले के अंदर जलने वाली लाइटों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होगा। सभी गंडोले सौर ऊर्जा से लैस रहेंगे।
बिजली उपकेंद्र बनने में लग जाएंगे तीन महीने
रोपवे के लिए भारत माता मंदिर परिसर में बन रहे बिजली उपकेंद्र में अभी करीब तीन महीने तक का समय लगेगा। जब तक बिजली उपकेंद्र बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक रोपवे का संचालन नहीं हो सकेगा। बीच-बीच में ट्रायल तो किया जाएगा लेकिन सुचारू रूप से संचालन के लिए उपकेंद्र का बनना जरूरी है।
शुक्रवार को पावर कॉरपोरेशन के एमडी पंकज कुमार ने निरीक्षण कर इसकी समीक्षा की थी और तेजी से बनाने के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर रात में काम तेज करने के लिए कैंट स्टेशन से काशी विद्यापीठ तक पिलर पर हाईमास्ट लाइटों को लगाने का काम भी तेज कर दिया गया ताकि रात के समय काम किया जा सके।