तेजी से चल रहा है काम
वीडीए सचिव डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा के अनुसार अब तक की जानकारी के अनुसार कैंट से गोदौलिया तक रोपवे का निर्माण होना है। इसकी डिजाइन में परिवर्तन की कोई सूचना नहीं है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) की अधिकारी के अनुसार गिरजाघर पर काम चल रहा है। आगे के काम की जानकारी नहीं है।
उधर, दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि गिरजाघर का पिछले दिनों निरीक्षण करने गया था। उस दौरान जनता की समस्याओं को ध्यान में रखकर रोपवे के अधिकारियों से आग्रह किया था इसे गिरजाघर तक की बनाएं। अभी तक मेरे आग्रह के बारे में कोई सूचना नहीं दी है।
जीपीआर तकनीक से सर्वे के फायदे
जीपीआर तकनीक से सर्वे करने के कई फायदे हैं। इससे जमीन के नीचे की सभी सीवर, बिजली, पानी की लाइनों का पता चल सकेगा। इससे रोपवे के पिलर के लिए बेस बनाने में आसानी होगी। जहां पर संभव नहीं होगा, वहां पिलर के लिए खोदाई नहीं की जाएगी। नीचे सीवर की बड़ी लाइन है। इसे छेड़ने से शहर की सीवर व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसे देखते हुए जीपीआर सर्वे कराया जा रहा है।
एनएचएलएमएल के अनुसार पहले चरण का काम मार्च 2025 तक पूरा किया जाना है। सभी रोप-वे स्टेशन पर वाराणसी के प्रतीक को दिखाने का प्रयास है। रोप-वे में डमरू-त्रिशूल-शंख-नदी और घाट, काशी की थीम दिख रही है। देश की धार्मिक राजधानी काशी में नए भवनों को धार्मिक स्वरूप दिया जा रहा है। दुनिया का तीसरे और देश के पहले अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए रोप-वे निर्माणाधीन है।
बोले अधिकारी
रोपवे को लेकर कार्यदायी एजेंसी की टेक्निकल टीम सर्वे कर रही है। 10 दिन बाद वे रिपोर्ट देगी। इसके बाद जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। इसमें कार्यदायी एजेंसी प्रजेंटेशन देगी। इसमें तय होगा कि रोपवे का आखिरी स्टेशन कहां हो। गिरिजाघर पर स्टेशन होगा तो यहां डिजाइन बदल जाएगी। - कौशलराज शर्मा, मंडलायुक्त