इंस्पेक्टर आदमपुर विमल मिश्रा ने बताया कि मकान की स्थिति जर्जर है। घटना की जानकारी नगर निगम को दे दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर भवनों के कारण आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।
शहर में जर्जर भवनों को लेकर नगर निगम की कार्रवाई पर भी सवाल उठते रहे हैं। नगर निगम की ओर से करीब पांच साल पहले शहर के पूर्व पांच जोन में 489 जर्जर भवन चिह्नित किए गए थे। इनमें से दालमंडी में हुई कार्रवाई को छोड़ दिया जाए तो अब तक ज्यादातर जर्जर भवनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
नगर निगम की ओर से कई बार बताया जाता है कि अधिकतम जर्जर भवनों से जुड़े मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। कुछ भवनों के स्वामियों का पता नहीं चल पाने की बात भी कही जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी वजह से कई भवनों के स्वामियों को नोटिस तक नहीं दिया जा रहा है।
शनिवार को जर्जर मकान की छत गिरने से महिला के घायल होने की घटना ने एक बार फिर शहर में चिह्नित जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके खिलाफ कार्रवाई की जरूरत को सामने ला दिया है।
जोन - जर्जर भवन
कोतवाली - 258
दशाश्वमेध - 152
रामनगर - 31
भेलूपुर - 14
आदमपुर - 13
वरुणापार - 12
सारनाथ - 9
कुल - 489