आयोजन के संयोजक संजीव रत्न मिश्रा (भानू), पं. दिनेश शंकर दूबे ने बताया कि महामारी से रक्षा के लिए इस अभिषेक में पार्थिव शिवलिंग का विशिष्ट महत्व है। शीघ्र फल प्राप्त करने की कामना से पार्थिवेश्वर शिवलिंग के पूजन का विस्तृत वर्णन शिव महापुराण में किया गया है। महामारी से रक्षा के लिए औषधीय हवन का विधान है। हवन कुंड में औषधियों के जलने से उसका प्रभाव वातावरण में दूर तक विस्तारित हो जाता है।
अनुष्ठान के समन्वयक ब्रह्म सेना के डॉ संतोष ओझा ने बताया कि आचार्य प्रवर चरक द्वारा प्रतिपादित जनपदोध्वंस रक्षा अभिषेक में कुशादक प्रक्रिया का पालन किया गया। चार सौ साल पहले गोस्वामी तुलसीदास ने महामारी नाश के लिए यह अनुष्ठान किया था। आरंभ होने से पूर्व अनुष्ठान स्थल को सेनेटाइज किया गया। पूरे अनुष्ठान में कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए वैदिक पंचदल के सदस्य, 12 वैदिक आचार्य ही अनुष्ठान स्थल पर उपस्थित हुए।
काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डा. कुलपति तिवारी द्वारा पूजन के उपरांत अभिषेक का आरंभ हुआ। आयोजन में मुख्य रुप से लव तिवारी, मनीष शंकर दूबे, मोहित पांडेय, अजय धर दुबे, विनोद तिवारी, रत्नेश पांडेय सहित अन्य लोग ने सहयोग किया।