बाल रोग विशेषज्ञ और अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में हाइपरथर्मिया की आशंका ज्यादा रहती है। हाइपरथर्मिया में शरीर का तापमान नॉर्मल टेंपरेचर से ज्यादा बढ़ जाता है।
बड़ों की तुलना में बच्चों में ये समस्या ज्यादा होती है क्योंकि बीमारी से लड़ने की क्षमता बहुत कम होती है। ऐसे में शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए बच्चों को हाइड्रेट रखना चाहिए। उधर, जिला अस्पताल में बाल रोग विभाग की ओपीडी में भी इस तरह की समस्या लेकर 15-20 बच्चे रोजाना आ रहे हैं।
अस्पतालों में बने चिल्ड्रन वार्ड में डॉक्टरों से भर्ती बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है। गंभीर समस्या होने पर बीएचयू में रेफर करने पर वहां डॉक्टरों से समन्वय स्थापित कर बच्चों को भर्ती करवाया जाएगा। - डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ