भागवत भूषण पं. मनमोहन गौर ने कहा कि संसार के मायाजाल में फंसा जीव सुखों की खोज में इधर-उधर भटकता है, लेकिन उसके सुख के कारण ही उसके दुख के कारण बन जाते हैं। यदि वास्तविक सुख पाना है तो हमें पितरों का सम्मान, श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए। श्री वल्लभाचार्य जयंती के उपलक्ष्य में चौखंभा स्थित बेटी जी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को पं. मनमोहन ने प्रह्लाद स्तुति, नारद युधिष्ठिर संवाद, गजेंद्र मोक्ष, सिंधु मंथन, देवासुर संग्राम आदि प्रसंगों का वर्णन किया।