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Varanasi News: Resolved to spread Ravidasiya religion, Raidasi started returning home

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माथे पर गुरु चरणों की रज, मन में रविदासिया धर्म के प्रसार का संकल्प लेकर रैदासियों का जत्था लौटने लगा। संत रविदास जयंती के बाद सोमवार को सीरगोवर्धन में बसा तंबुओं का शहर वीरान होने लगा। घरों के लिए खरीदारी, संत रविदास के चित्र, प्रसाद के रूप में मंदिर में चढ़ाया कपड़ा और संत निरंजन दास का आशीष लेकर फिर अगले साल आने की कामना से रैदासी बेगमपुरा से रवाना हुए।
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संत निरंजन दास के साथ संगत स्पेशल ट्रेन से बनारस स्टेशन से पंजाब के लिए रवाना हुई। संगत को छोड़ने पहुंचे सेवादार, मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोग भावुक हो उठे। संगत के लौटने का दुख हर किसी की आंखों से छलक उठा। तीन दिनों तक गुलजार रहने के बाद मेले की रंगत धीरे-धीरे कम होने लगी थी। एक-एक करके संगत अपने-अपने घरों को लौटने लगी। पंडालों में ठहरी संगत और सेवादार भी अब वापसी की राह पकड़ चुके थे। ट्रेन में खाने के लिए संगत को सूखी सब्जी, रोटी, मिठाइयां, डिब्बा बंद दही का पैकेट मंदिर ट्रस्ट की तरफ से दिया गया है। मेला क्षेत्र में साफ सफाई करने के लिए नगर निगम के कर्मचारी जुटे हुए थे। गुरु के दर से वापस लौटते हुए सेवादारों ने एक दूसरे को गले लगाकर फिर अगले साल मिलने का वादा किया।
जमकर की खरीदारी, छका लंगर
श्रद्धालुओं के लौटने का सिलसिला सोमवार सुबह से ही शुरू हो गया था। तंबुओं के शहर में तब्दील सीरगोवर्धनपुर से पंडाल भी धीरे-धीरे हटने शुरू हो गए। सुबह श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों का आशीर्वाद लिया और खरीददारी के बाद लंगर भी छका। इसके बाद सामान समेटकर घर वापसी के लिए निकले तो कई श्रद्धालुओं की आंखों में गम नजर आया।
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रविदासिया को मिले अलग धर्म का दर्जा
वाराणसी। देश विदेश से आए ट्रस्ट और संगठन के पदाधिकारियों ने मंदिर में बैठक कर रविदासिया धर्म को संवैधानिक दर्जा और जनगणना में अलग धर्म का कालम दर्ज करने की मांग उठाई। पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार को पत्र दिया जा चुका है। रविदासिया धर्म के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संत मनदीप दास, सुखदेव वाघमारे, महेंद्र पाल, सतपाल विर्दी, निरंजन चीमा, वीरेंद्र दास और बब्बू शामिल रहे।
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