बीएचयू के जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि श्रीलंका की कोलंबो यूनिवर्सिटी ने डीएनए जांच के लिए नमूने जुटाए थे। जीनोटाइप बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट में डॉ. नीरज राय ने किया। इसका पूरा अध्ययन बीएचयू के ज्ञान लैब में हुआ है। चंक एनालसिस के लिए डीएनए को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा गया। इसके बाद हर एक पापुलेशन के साथ इन डीएनए के पार्ट की तुलना की गई। छोटे वाले डीएनए बताते थे कि उसका संबंध काफी प्राचीन है।
इनकी गिनती के बाद पता चला कि सिंहली लोगों में मराठों का डीएनए तमिल के मुकाबले 16 फीसदी ज्यादा था। प्रो. चौबे ने बताया कि कोई एक आबादी थी, जो मराठाें से अलग हुई। ये जब मिलना शुरू हुए तो बहुत कुछ तो मिक्स हो गया, लेकिन फिर भी कुछ ऐसे ट्रेसेज ऑफ डीएनए थे, जो अभी मिक्स नहीं हुए थे। हमने देखा कि जो मिक्स नहीं हुआ वो 16 फीसदी मराठों का था।
महाराष्ट्र में स्थित अजंता की गुफाओं में बनी चित्रकारी में सिंहल राजा को दिखाया गया है। श्रीलंका के राजा विजय हाथियों और सवारों के समूहों में नजर आ रहे हैं।