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वैराग्य का अर्थ घर-परिवार त्याग नहीं : वेदांती

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श्रीराम मंदिर गुरूधाम में रामानंदाचार्य के 726 वें प्राकट्य महोत्सव पर श्रीराम कथा का आयोजन हुआ। कथा के 6वें दिन जगद्गुरु स्वामी राम कमलाचार्य वेदांती महाराज ने कहा कि वैराग्य का अर्थ घर-परिवार छोड़ना नहीं बल्कि बुराइयों का त्याग कर मानव मात्र में ईश्वर का दर्शन करना है। उन्होंने पंचवटी और सीताहरण प्रसंग के माध्यम से बताया कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के समन्वय से ही जीवन सार्थक होता है। स्वर्ण मृग प्रसंग का उल्लेख कर कहा कि जब मनुष्य ईश्वर से विमुख होकर भौतिक सुखों के पीछे दौड़ता है तभी दुख और अशांति उत्पन्न होती है। इससे संतों के आश्रय से ही मुक्ति संभव है। इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रधान अर्चक श्रीकांत मिश्र को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। संयोजन पं. रामभरत शास्त्री ने किया।
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