दिवाली और छठ पर महानगरों से लौटने वालों को ट्रेन में जगह नहीं मिल रही है। मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, नई दिल्ली, पंजाब से बिहार-झारखंड जाने वाली ट्रेनों में तो स्थिति बहुत खराब है। यात्री फर्श पर बैठकर यात्रा करने को विवश हैं।
साहब, बस किसी तरह सीट दिलवा दीजिए। सीट नहीं है तो चादर बिछाकर फर्श पर ही सफर कर लेंगे। बस कोच से बाहर मत उतारिए। यह संवाद रेल यात्रियों और ट्रेन में सवार टीटीई के बीच शुक्रवार को देखने को मिला। वातानुकूलित तृतीय श्रेणी कोच और स्लीपर में ज्यादातर यात्री फर्श पर चटाई, चादर बिछाकर सफर करने पर मजबूर दिखे। लंबी दूरी की ट्रेनों में एसी कोच की हालत जनरल से भी बदतर हो गई है। यात्री सोशल मीडिया पर भी शिकायत कर रहे हैं।
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दिवाली और छठ पर महानगरों से लौटने वालों को ट्रेन में जगह नहीं मिल रही है। मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, नई दिल्ली, पंजाब से बिहार-झारखंड जाने वाली ट्रेनों में तो स्थिति बहुत खराब है। यात्री फर्श पर बैठकर यात्रा करने को विवश हैं। टायलेट के पास चादर, चटाई बिछाकर और कोच के अंदर जैसे-तैसे मंजिल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में आरक्षित टिकट वाले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें टायलेट तक पहुंचने में काफी दिक्कत हो रही है। शुक्रवार को कैंट रेलवे स्टेशन से बिहार, राजगीर जाने वाली श्रमजीवी एक्सप्रेस, कोटा-पटना, विभूति, पवन एक्सप्रेस में एसी कोच में जनरल जैसी भीड़ दिखी। विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि थर्ड एसी में इतनी भीड़ थी कि लगा कि जैसे जनरल कोच में सफर कर रहे हैं।
ई-टिकट कम, विंडो टिकट ज्यादा खरीद रहे यात्री
टीटीई ने बताया कि इस समय विंडो टिकट लेकर यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ी है। दरअसल, ई-टिकट कंफर्म नहीं होने पर उससे सफर नहीं किया जा सकता है। जबकि विंडो टिकट लेकर वेटिंग टिकट पर भी कोच में सवार हो सकते हैं। यात्री जनरल टिकट लेकर भी सफर कर रहे हैं। स्टेशनों पर सीट खाली होने पर जनरल टिकट वालों की रसीद काटकर टिकट बनाई जाती है।