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अच्छी पहल: काशी के सहेजे जाएंगे धर्म और संस्कृत से जुड़े दुर्लभ शोधपत्र, देशभर के विशेषज्ञ करेंगे अध्ययन

Fri, 14 Aug 2026 11:02 AM IST
Pragati Chand हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी में पांडुलिपियां डिकोड होंगी। धर्म और संस्कृत से जुड़े दुर्लभ शोधपत्रों पर देशभर के विशेषज्ञ अध्ययन करेंगे। विशेषज्ञ इन दस्तावेजों और पांडुलिपियों का अध्ययन कर उनके संदर्भ, भाषा और विषयवस्तु को समझने का प्रयास करेंगे। 
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प्रो. रामनारायण द्विवेदी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में जैतपुरा के नागकूप में देशभर से प्राप्त धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण शोधपत्रों को संरक्षित किया जाएगा। इनका अध्ययन देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े धर्म और संस्कृत के विद्वान और विशेषज्ञ करेंगे। इस पहल का उद्देश्य ऐसी पांडुलिपियों और दस्तावेजों में दर्ज सामग्री को विशेषज्ञों की मदद से पढ़ना और उसकी व्याख्या करना है, जिन्हें सामान्य तौर पर समझना आसान नहीं है। देशभर के धर्म और संस्कृत के जानकारों को अध्ययन प्रक्रिया से जोड़ने की योजना है। 

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उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति के महामंत्री और बीएचयू में व्याकरण के आचार्य प्रो. राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत धर्म से संबंधित देशभर में प्रकाशित शोधपत्रों को एक जगह उपलब्ध कराने और अलग-अलग स्थानों पर मौजूद शोध सामग्री को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। इससे उसके तुलनात्मक अध्ययन का रास्ता खुलेगा। विशेषज्ञ इन दस्तावेजों और पांडुलिपियों का अध्ययन कर उनके संदर्भ, भाषा और विषयवस्तु को समझने का प्रयास करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी इसका देशव्यापी प्रसार होगा। 

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पांडुलिपियों, भोजपत्रों और क्रोड पत्रों के अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों की व्याख्या को रियल टाइम में देशभर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। यानी काशी में किसी दुर्लभ पांडुलिपि पर विशेषज्ञों का अध्ययन चल रहा होगा तो उससे जुड़ी जानकारी और उसकी व्याख्या देश के दूसरे हिस्सों में भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। 

इस परियोजना में देशभर के धर्म और संस्कृत व अलग-अलग परंपराओं, भाषाओं और धार्मिक ग्रंथों की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ पांडुलिपियों को पढ़ने, उनके संदर्भों को समझने और उपलब्ध सामग्री की व्याख्या करने में सहयोग करेंगे।

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नागकूप पर मिलेगा हर शास्त्रीय और धर्म की शंका का जवाब 
प्रो. राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रार्थ की परंपरा काशी जितनी ही पुरानी और जीवंत है। नागकूप में धर्म का लोकतांत्रिक पक्ष दिखता है। इस शास्त्रार्थ में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम या सवाल बनाकर नहीं दिए जाते। शास्त्र परंपरा से जुड़े हर प्रश्न यहां के विद्वानों के समक्ष स्वतंत्र रूप से रखे जाते हैं जिसका सम्यक उत्तर भी गुरुजन देते हैं। यदि पंजीकरण नहीं हुआ है तो भी कई विद्वान यहां आकर अपने विषयों, प्रश्नों और शंकाओं को स्वतंत्र रूप से रखते हैं। धर्म में हुए शोध पत्रों को भी पटल पर रखा जाता है, जिस पर आगे की कार्य योजनाएं तैयार होती हैं। नागकूप के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व व संस्कृत शास्त्रों की परंपरा पर भी चर्चा होगी। 
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