नागकूप पर मिलेगा हर शास्त्रीय और धर्म की शंका का जवाब
प्रो. राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रार्थ की परंपरा काशी जितनी ही पुरानी और जीवंत है। नागकूप में धर्म का लोकतांत्रिक पक्ष दिखता है। इस शास्त्रार्थ में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम या सवाल बनाकर नहीं दिए जाते। शास्त्र परंपरा से जुड़े हर प्रश्न यहां के विद्वानों के समक्ष स्वतंत्र रूप से रखे जाते हैं जिसका सम्यक उत्तर भी गुरुजन देते हैं। यदि पंजीकरण नहीं हुआ है तो भी कई विद्वान यहां आकर अपने विषयों, प्रश्नों और शंकाओं को स्वतंत्र रूप से रखते हैं। धर्म में हुए शोध पत्रों को भी पटल पर रखा जाता है, जिस पर आगे की कार्य योजनाएं तैयार होती हैं। नागकूप के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व व संस्कृत शास्त्रों की परंपरा पर भी चर्चा होगी।