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Varanasi: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को कोर्ट से राहत, FIR और आरोप पत्र को निरस्त करने का दिया आदेश

Thu, 25 Jan 2024 01:17 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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जीएसटी बिल के विरोध को लेकर धरना-प्रदर्शन करने और प्रधानमंत्री का पुतला फूंकने के मामले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को बुधवार को राहत मिल गई। इस मामले में अजय राय के अधिवक्ता ने एमपी-एमएलए कोर्ट में आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज करने, विवेचना कर आरोप पत्र प्रेषित करने और मजिस्ट्रेट द्वारा इस पर संज्ञान लेने पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

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अधिवक्ता ने कहा था कि आईपीसी की धारा 188 के तहत एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। केवल परिवाद दाखिल हो सकता है, जो कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 के तहत प्रतिबंधित है। अधिवक्ता के इस कथन पर एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर एफआईआर और आरोप पत्र को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा आईपीसी की धारा 188 के तहत दर्ज एफआईआर और आरोप पत्र को निरस्त कर दिया गया। उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति एमपी-एमएलए के कोर्ट में दाखिल की गई। इस पर कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए अजय राय के खिलाफ लंबित इस मुकदमे को निरस्त करते हुए पत्रावली को दाखिल दफ्तर किए जाने का आदेश पारित किया।

प्रकरण के अनुसार, तत्कालीन लहुराबीर चौकी प्रभारी अमरेंद्र कुमार पांडेय ने एक जुलाई 2017 को चेतगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 30 जून 2017 की मध्य रात्रि देश में लागू होने वाले जीएसटी कानून के विरोध में पूर्व विधायक अजय राय के नेतृत्व में 50-60 अज्ञात व्यक्ति दोपहर 12 बजे सरकार के खिलाफ आक्रामक नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला लेकर फूंकने के लिए लहुराबीर चौराहे पर आए। इस पर जब पुलिस उन्हें जनपद में धारा-144 लागू होने का हवाला देकर रोकते हुए पुतला छीनने का प्रयास करने लगी।
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इसी दौरान पहले से साथ लाए गए पेट्रोल को दूर से फेंककर पुतला जला दिया। जिसके बाद अजय राय समेत 50-60 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया गया था। इसी मामले में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश चौबे को एसीजेएम / एमपी-एमएलए कोर्ट उज्ज्वल उपाध्याय की अदालत ने 18 अगस्त 2022 को दोषी पाते हुए 200 रुपये का अर्थदंड भी लगाया था।

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