सांसद चंद्रशेखर आजाद पहुंचे सीर गोवर्धन।
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...शिकारी से हिरणी की बचाई थी जान : कबीर की जन्मस्थली लहरतारा में भी संत रविदास ने तपस्या की थी। तब यह पूरा इलाका जंगल था। संत रविदास जंगल में तपस्या कर रहे थे, तभी शिकारी से बचने के लिए हिरणी उनके पास आकर छिप गई थी। शिकरी गुरु के भाव से नतमस्तक हो गया।
गंगा में तैरा दिया था पत्थर : संत रविदास ने राजघाट पर धर्म परीक्षा दी थी। काशी के कर्मकांडियों ने संत रविदास के पूजा करने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने रविदास जी को चुनौती दी थी कि अगर आप पत्थर में भगवान को देखते हैं तो इसे गंगा में तैराकर दिखाए। उन्होंने राजघाट पर गंगा में पत्थर तैराकर दिखाया था।
संत की सोच बेगमपुरा जैसी
गुरु रविदास मंदिर राजघाट में रविदास जन्मोत्सव समारोह के दूसरे दिन लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार के बेटे डॉ. अंशुल अभिजित ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि संत रविदास की सोच बेगमपुरा जैसे आधुनिक भारत की थी जहां कोई भेदभाव नहीं है।
दी रविदास स्मारक सोसाइटी के महासचिव रतन लाल भगत ने कहा कि बाबू जगजीवन राम संत रविदास के अनन्य भक्त थे। यह मंदिर समतामूलक समाज की संकल्पना का प्रतीक है। समारोह में सर्वश्री रतन लाल भगत, वीरेंद्र कुमार, मदन भगत, मनोज कुमार, डॉ. जयशंकर जय किशन भगत, पुजारी रामबिलास दास, धीरज माली, मोहित राय और अनुज यादव आदि उपस्थित रहे।