वाराणसी के मणिकर्णिका तीर्थ के पास स्थित प्राचीन रत्नेश्वर महादेव मंदिर के ढहने की आशंका बनी हुई है। लंबे समय से मरम्मत के अभाव में शिखर से लेकर दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो चुकीं हैं। स्वागत काशी फाउंडेशन के संयोजक अभिषेक शर्मा ने मंदिर को सहेजने के लिए पीएम से गुहार लगाई थी। उनके आवेदन पर जो जवाब आया है उससे वो हैरान हैं। मामले में उन्होंने वाराणसी नगर निगम पर प्रधानमंत्री कार्यालय को गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है।
अभिषेक शर्मा ने बताया कि जुलाई में प्रधानमंत्री को रत्नेश्वर महादेव मंदिर को सहेजने के संदर्भ में पत्र लिखा। इसके जवाब में पीएमओ से पत्र आया। जिसमें लिखा गया है कि आपकी शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है। पत्र में रत्नेश्वर महादेव मंदिर की जगह 16 महीने पहले की गई दूसरी शिकायत का निस्तारण किया गया है।
यह शिकायत अस्सी स्थित छोटा नागपुर वाटिका की गली में हेरिटेज पोल पर लाइट लगाने से संबंधित था। अभिषेक ने बताया कि जो शिकायत 16 माह पहले की गई थी उसका जवाब रत्नेश्वर महादेव मंदिर वाले सवाल के तौर पर दे दिया गया है। जबकि, रत्नेश्वर महादेव मंदिर के शिखर की मरम्मत और रख-रखाव से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी गई है।
पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है रत्नेश्वर महादेव मंदिर
रत्नेश्वर महादेव मंदिर का तीन-चौथाई हिस्सा गंगा में डूबा
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प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में अभिषेक ने कहा है कि रत्नेश्वर महादेव का मंदिर काशी की अमूल्य धरोहर है और पूरे विश्व में विख्यात है। सात साल पहले मंदिर के शिखर पर आकाशीय बिजली गिरी थी। इसके कारण मंदिर के शिखर का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इसकी मरम्मत अभी तक नहीं हो सकी है।
काशी आने वाला हर पर्यटक इसको देखने के लिए यहां आते हैं। हर बार बाढ़ में यह मंदिर गंगा में समाहित हो जाता है। डेढ़ साल पहले प्रधानमंत्री ने भी मंदिर की चर्चा की थी। इस मंदिर की मरम्मत होने से हम इस अमूल्य धरोहर को बचा सकेंगे। गंगा की तलहटी में बना यह मंदिर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।