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16 जुलाई से रथयात्रा मेला: कॉरिडोर की भव्यता के बीच सजेगा काशी का लक्खा मेला, 29 जून को महास्नान; तैयारी

Mon, 15 Jun 2026 10:14 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Rath Yatra Mela: वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर की भव्यता के बीच जगन्नाथ रथयात्रा का प्रसिद्ध लक्खा मेला सजेगा। 29 जून को महास्नान के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। 16 घंटे के महाभिषेक के बाद प्रभु जगन्नाथ एकांतवास में जाएंगे। इसके बाद 16 जुलाई से रथयात्रा मेला शुरू होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
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काशी का रथयात्रा मेला। - फोटो : अमर उजाला
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Varanasi News: काशी में विश्व प्रसिद्ध लक्खा मेलों की शुरुआत भगवान जगन्नाथ के अभिषेक के साथ होगी। तीन दिवसीय मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु जुटेंगे। मंदिर न्यास के पदाधिकारियों के मुताबिक, इस बार जगन्नाथ कॉरिडोर बनने की घोषणा के बाद मेले को और भव्य बनाया जाएगा।

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जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के सचिव शैलेष त्रिपाठी ने बताया कि उत्सव की शुरुआत 29 जून को ज्येष्ठ स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर होगी। मान्यताओं के अनुसार, अपने भक्तों द्वारा श्रद्धाभाव से कराए गए अत्यधिक स्नान के कारण भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसके बाद वे अगले 14 दिनों तक एकांतवास में चले जाते हैं। इस दौरान भक्तों के लिए मंदिर के कपाट बंद रहेंगे।

धार्मिक परंपरा के अनुसार, 29 जून को स्नान पूर्णिमा के दिन सूर्योदय होते ही न्यास के पदाधिकारियों द्वारा भगवान जगन्नाथ का गंगाजल और पंचामृत से विधि-विधानपूर्वक महाअभिषेक किया जाएगा। इसके बाद दिनभर आम श्रद्धालुओं को भी भगवान का जलाभिषेक करने का अवसर मिलेगा। लगातार 16 घंटे तक चलने वाले इस महाअभिषेक के बाद प्रभु अस्वस्थ हो जाएंगे। 

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अस्वस्थ होने के बाद भगवान जगन्नाथ 14 दिनों के लिए ‘अणसर गृह’ (एकांतवास) में चले जाएंगे। इस दौरान भगवान का विशेष आयुर्वेदिक उपचार किया जाता है। अगले दो सप्ताह तक उन्हें अन्न-जल के स्थान पर जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़े का भोग लगाया जाएगा। एकांतवास के अंतिम दिन यानी 14 जुलाई को प्रभु को परवल के रस से बने काढ़े का भोग अर्पित किया जाएगा, जिसके बाद वे पूर्णतः स्वस्थ हो जाएंगे।

15 जुलाई को स्वस्थ होने के बाद भगवान जगन्नाथ का पीतांबरी वस्त्रों और फूलों से अलौकिक शृंगार किया जाएगा। इस दिन भगवान अपने भक्तों को नवयौवन रूप में दर्शन देंगे। दर्शन का यह सिलसिला दिनभर चलेगा, जिसके बाद भगवान की भव्य डोली यात्रा निकाली जाएगी। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ बेनियाबाग स्थित मौसी के घर के लिए प्रस्थान करेंगे।
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रात में रथारूढ़ होंगे भगवान जगन्नाथ
ट्रस्ट के सचिव शैलेष त्रिपाठी ने बताया कि 15 जुलाई की रात भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र को विशाल रथों पर विराजमान कराया जाएगा। फूल-मालाओं और विद्युत झालरों से सजे इन रथों की भव्यता देखते ही बनेगी। इसके बाद 16 जुलाई की भोर से काशी के प्रसिद्ध तीन दिवसीय रथयात्रा मेले (लक्खा मेले) की औपचारिक शुरुआत होगी। यह महापर्व आस्था, समर्पण और काशी की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।
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