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सत्य और न्याय की यात्रा था राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्त का जीवन : प्रो. श्रद्धानंद

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काशी विद्यापीठ में के पुस्तकालय में राष्ट्र रत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त की जयंती पर हुए समारोह
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राष्ट्ररत्न बाबू शिवप्रसाद गुप्त का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उनका संपूर्ण जीवन सत्य, न्याय, राष्ट्रसेवा और त्याग की मिसाल रहा। स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने तन-मन-धन से योगदान देकर देश की आजादी की लड़ाई को मजबूती प्रदान की। ये विचार काशी विद्यापीठ के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. श्रद्धानंद ने रविवार को राष्ट्ररत्न बाबू शिवप्रसाद गुप्त की 143वीं जयंती पर व्यक्त किए।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय में कर्मपथ फाउंडेशन की ओर से मेधा-उद्यमिता अभिनंदन समारोह एवं राष्ट्ररत्न के दृष्टिकोण में विकसित भारत और युवा पीढ़ी विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि राष्ट्ररत्न बाबू शिवप्रसाद गुप्त ने अपनी चौखट पर हर स्वतंत्रता सेनानी का सम्मान किया। उन्होंने नरम और गरम दोनों दलों के नेताओं को आर्थिक सहयोग देकर स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी। जेल जाने वाले सेनानियों के परिवारों का हर स्तर पर सहयोग किया।
दिव्यांग पीठ के संस्थापक कृपानंद महाराज ने कहा कि राष्ट्ररत्न बाबू शिवप्रसाद गुप्त राष्ट्रवादी सोच को धरातल पर उतारने वाले संत थे। काशी विद्यापीठ, भारत माता मंदिर और मंडलीय अस्पताल उनकी राष्ट्रवादी सोच के प्रतीक हैं। काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अत्रि भारद्वाज, प्रो. सुधीर कुमार शुक्ला, प्रो. केके सिंह, मुख्य गृहपति प्रो. नागेंद्र सिंह, समाजसेवी देव कुमार, राजू एवं सुशील गुप्ता योगी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर राष्ट्ररत्न के सम्मान पर आधारित संकल्प दर्पण का विमोचन किया। उद्यमियों और मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। संचालन शिवजनक गुप्ता, धन्यवाद ज्ञापन अंकित कुमार और स्वागत प्रेमप्रकाश गुप्ता ने किया।
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