काशी में जम्मू-कश्मीर राज परिवार की निशानी जम्मू कोठी पर बाबा विश्वनाथ मंदिर का अधिकार हो गया है। खंडहर के रूप में तब्दील हो चुकी इस जर्जर कोठी को गिराकर जल्द ही मलबा हटाया जाएगा, ताकि वहां नए सिरे से निर्माण कराया जा सके। कोठी का बैनामा जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट के सचिव शशि खजूरिया ने किया है। इस कोठी का निर्माण महाराजा रणवीर सिंह ने काशी में कश्मीर के श्रद्धालुओं, अतिथियों के ठहरने के लिए 18वीं शताब्दी में कराया था।
दशाश्वमेध की टेढ़ीनीम मुहल्ले में डी 14/51 और डी 14/3 दो रकबे पर जम्मू कोठी है। इसमें डी 14/51 का बैनामा धर्मार्थ ट्रस्ट के सचिव खजूरिया ने किया है। पांच मंजिला कोठी के तीन तल जर्जर होकर ढह चुके हैं। खंडहर के रूप में तब्दील हो चुकी कोठी में प्रवेश करने पर नगर निगम प्रशासन पहले ही रोक लगा चुका है। गिरने के कगार पर पहुंची कोठी को गिराने का नोटिस भी नगर निगम की ओर से जारी किया गया है।
530 स्क्वायर मीटर में बनी इस कोठी का निर्माण चुनार के बलुआ पत्थरों से राजा रणवीर सिंह ने कराया था। दूसरे हिस्से में होटल और दुकानें हैं, जिसे अभी बेचा नहीं गया है। बताते हैं कि महल सरीखी इस कोठी में पांच सौ से अधिक कक्ष थे लेकिन तीन तल ढह चुका है। कोठी की शेष दो मंजिल के भी कक्ष टूटे, ढहे और असुरक्षित हैं। मलबे के ढेर में कई हिस्सा दबा हुआ है। रविवार को मजदूर मलबे में दबे इमारती समान और कुछ पत्थरों को निकालने में जुटे रहे। मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी ने बताया कि जल्द ही मलबा हटवाकर नया निर्माण आरंभ कराया जाएगा। इस कोठी के बाहरी हिस्से की दुकानों को भी मंदिर प्रशासन जल्द ही खाली कराकर कब्जा लेने की तैयारी में है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीएन द्विवेदी ने बताया कि कोठी में वर्ष 2012 तक वेद विद्यालय चलता था और उसमें बटुक और आचार्य रहते भी थे।
बाबा विश्वनाथ के नाम हुई जम्मू कोठी में अब अन्नक्षेत्र खोलने की योजना है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी ने रविवार को आर्किटेक्ट से नक्शा बनवाकर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस कोठी में भक्तों के लिए ठहरने के लिए अतिथि शाला के निर्माण के साथ ही अन्नक्षेत्र का भी निर्माण कराया जाएगा। नोएडा के पूर्व टाउन प्लानर राजपाल कौशिक, किंग जावडेकर समेत पांच वास्तुविदों से अन्नक्षेत्र का नक्शा तैयार कराने के लिए संपर्क साधा गया है।