रंजना ने यह सफलता अंडर-16 आयु वर्ग में हासिल की है। वह वर्तमान में भोपाल में रहकर इंटरमीडिएट की पढ़ाई के साथ-साथ एथलेटिक्स की तैयारी कर रही हैं। उनकी खेल यात्रा की शुरुआत अंडर-12 आयु वर्ग से हुई थी, जब उन्होंने वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में कोच चंद्रभान यादव की देखरेख में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।
रंजना ने 13 अक्तूबर को ओडिशा में आयोजित प्रतियोगिता की छह किलोमीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था। उनके पिता राजकुमार यादव पिछले 35 वर्षों से गुजरात के मेहसाणा में दूध ट्रक ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं। बेटी की इस सफलता की खबर सुनकर उन्होंने भावुक होकर कहा, मेरी बेटी ने हमारे सपनों को हकीकत में बदल दिया है।
अब उसका अगला लक्ष्य गोल्ड मेडल है। गांव में रंजना की इस उपलब्धि से खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों और परिजनों ने ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाइयां बांटकर इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। लोगों ने कहा कि रंजना ने यह साबित कर दिया है कि अगर गांव की बेटियां ठान लें, तो वे भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।