होली की मस्ती में इन दिनों पूरी काशी डूबी हुई है। संतों ने फूलों की होली खेली फाग गाया और होली का त्योहार मनाया। इस दौरान नाचते गाते भगवाधारियों ने विश्वशांति की कामना की।
धार्मिक नगरी काशी में रंगभरी एकादशी के दिन से होली की शुरुआत होती है। होली का अलग-अलग रंग काशी में देखने को मिलता है यहां की होली खास होती है। मठों में वास करने वाले संत भी फाग गाकर होली का पर्व मनाते हैं। वाराणसी के पातालपुरी मठ में संतों ने होली खेली। फूल की पंखुडियां उठाई और होली का पर्व मनाया। इस दौरान जगतगुरु बालक देवाचार्य भी मौजूद रहे।
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बता दें कि काशी का फगुआ अपने आप में खास होता है। यहां पर बसंत पंचमी से होली का रंग चढ़ने लगता है महाशिवरात्रि पर होली का रंग गाढ़ा होता है और जब रंग भरी एकादशी पर भक्त बाबा विश्वनाथ के साथ होली खेल लेते हैं तब ये रंग और भी चढ़ जाता है। सभी महादेव की भक्ति में डूबकर होली का पर्व मनाते हैं कोई रंग खेलता है। कोई गुलाल उड़ाता है तो वहीं कोई फूलों की होली खेलता है।