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खजूर इफ्तार का राजा तो घुघनी रानी

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गाजीपुर/बहरियाबाद। रमजान में रोजा रखने के लिए जहां सहरी आवश्यक है तो वहीं रोजा खोलने के लिए इफ्तार करना भी। इफ्तार के व्यंजनों में तरह-तरह के पकवान तो शामिल होते ही हैं खास तौर से इसमें खजूर और चने की घुघनी की अलग ही जगह है। बिना इसके इफ्तार का दस्तरख्वान अधूरा रहता है। कहा जाता है कि अगर खजूर इफ्तार का राजा है तो घुघनी रानी है। रमजान में इफ्तार और सहरी का खास स्थान है। रोजा रखने के लिए जहां रात के अंतिम पहर में सहरी करना जरूरी है वहीं शाम को रोजा खोलने के लिए इफ्तार का भी अपना स्थान है। इसमें खजूर के बाद तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। मसल, पकौड़ी, मैदे और सूजी से बनी मीठी टिकिया और खजूर, दही-बड़े, आलू दम, कई तरह के पापड, शर्बत और खजूर। इनमें खजूर और पानी से रोजा खोलना सुन्नत है। इसके बाद लोग जायकेदार व्यंजनों से इफ्तार करते हैं। इफ्तार की तैयारी में घर की महिलाएं दोपहर से ही जुट जाती हैं और मगरिब (गोधूलि बेला) के समय तक इफ्तार बनकर इसे दस्तरख्वान पर सजा भी देती हैं। इसमें जायकेदार व्यंजन तो होते ही हैं सेहत का भी ध्यान रखा जाता है। यानी तरह-तरह के फल और कम तेल मसाले के लजीज व्यंजन। इफ्तार का दस्तरख्वान बिना खजूर और चने की घुघनी के पूरा नहीं होता। इतना ही नहीं घुघनी के साथ पानी में फूली हुई चने की दाल जब नींबू और पुदीने के साथ पेश की जाती है तो मानों इफ्तार का मजा ही कुछ और हो जाता है। बरबरहना निवासी तहसीन अहमद, सिटी रेलवे स्टेशन निवासी नन्हें खां और बहिरयाबाद के दानिश और आमिर अब्बासी बताते हैं कि अगर खजूर इफ्तार का राजा है तो घुघनी रानी से कम नहीं। जबकि कई और व्यंजन इफ्तार का मजा दोगुना कर देते हैं। इफ्तार में शामिल खाने पीने की सभी चीजें पौष्टिकता से भरपूर होती हैं।
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