राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि काशी स्प्रिच्युअल सिटी से स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। यहां वैदिक कर्मकांड और गंगा आरती देखी जा सकती है तो बीएचयू, आईआईटी और अन्य संस्थानों की आधुनिकतम प्रयोगशालाओं में निरंतर शोध चल रहे हैं। प्राचीन परंपराओं के साथ-साथ आधुनिक बदलावों को अपनाने का समन्वय काशी की विशेषता है।
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व्यापार सुविधा केंद्र के रूप में दीनदयाल हस्तकला संकुल की स्थापना इसका नवीनतम उदाहरण है। काशी के पांच सपूतों को भारतरत्न मिला है। यहां के सांसद पीएम हैं। उन्होंने यहां के विकास में काफी योगदान दिया है।
सोमवार को लगभग सात घंटे के प्रवास के दौरान राष्ट्रपति कोविंद ने सबसे पहले हस्तकला संकुल में कौशल विकास से जुड़ी प्रदर्शनी देखी। कहा, प्रदर्शनी में बदलते भारत की तस्वीर देखने को मिली। दो सत्र में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने काशी को 3473 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात दी। पहले सत्र में उन्होंने एनएचएआई के दो समूहों में पांच निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया।
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इनमें 1355 करोड़ रुपये के वाराणसी रिंग रोड फेज टू के दो निर्माण कार्य और 2118 करोड़ रुपये से वाराणसी-हनुमना राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या सात के 125 किमी राजमार्ग के फोरलेन के तीन कार्य शामिल है। इसके अलावा कौशल विकास मिशन के तहत पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आए 1310 युवाओं को नियुक्ति प्रमाणपत्र दिया गया। इनमें 10 युवाओं को राष्ट्रपति ने मंच पर बुलाकर प्रमाणपत्र दिया।
दूसरे सत्र में राज्यपाल राम नाईक की संस्कृत में अनुदित पुस्तक चरैवेति चरैवेति के विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। पुस्तक की पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की गई। पुस्तक में राम नाईक के जीवन दर्शन के बारे में बताया गया है। लैंपपोस्ट के नीचे पढ़ने से लेकर राजनीति में किए गए कार्यों को मिसाल के तौर पर पेश किया गया है।
मंच पर केंद्रीय सड़क परिवहन राज्यमंत्री मनसुख एल मांडविया, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, प्रदेश के खेल मंत्री चेतन चौहान, सूचना राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, हरिद्वार समन्वय सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामीअवधेशानंद गिरी, एनएचएआई के चेयरमैन दीपक कुमार, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा के अलावा जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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फोरलेन बनने पर बढ़ जाएगा काशी का पर्यटन
हस्तकला संकुल में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : twitter
वाराणसी-हनुमना राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच सेवन) के फोरलेन होने के बाद काशी से कन्याकुमारी की दूरी लगभग ढाई घंटे कम हो जाएगी। इससे दक्षिण भारत से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय शिल्प के कारोबार में चार चांद लग सकते हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को एनएच-7 को फोरलेन करने के कार्य का शिलान्यास किया।
दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से मध्य प्रदेश तक की सड़कें फोरलेन हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने पर दो लेन की संकरी और गड्ढायुक्त सड़कों के कारण श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ जाती है। वाराणसी से हनुमना तक 140 कलोमीटर का रास्ता तय करने में पांच घंटे से ज्यादा लगता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग सात: वाराणसी, चुनार, मिर्जापुर, लालगंज, हनुमना, मऊगंज, रीवा, अमरपाटन, मैहर, जुकेही, कटनी, सिहोरा, जबलपुर, बर्गी, हुल्की होते हुए नागपुर, अदीलाबाद, हैदराबाद, बंगलुरु, मदुरै, तिरुमंगलम से कन्याकुमारी।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार दोपहर सर्किट हाउस में बनारसी व्यंजनों का लुत्फ उठाया। तीनों वीवीआईपी और उनके साथ आए 60 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत मसाला छाछ और टमाटर के शोरबे से किया गया। इसके साथ ही भोजन के बाद अंत में लांचा, रसमलाई और मौसमी फल परोसे गए।
खानपान की जिम्मेदारी ताज होटल के एक्जीक्यूटिव अनूप गुप्ता ने बताया कि भोजन में हरे चने की घुघरी, बनारसी कढ़ी-पकौड़ी, पनीर टकाटक, आलू दम बनारसी, परवल की भुजिया, दाल, गोभी-मटर की तहरी, दहीबड़ा, मल्टी ग्रेन रोटी और मिस्सी रोटी परोसी गई।