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Ramnagar Ki Ramlila: 16वें दिन हुई नक्कटैया की लीला, लक्ष्मण ने काटी सूर्पनखा की नाक, रावण ने किया सीताहरण

Sat, 24 Sep 2022 11:36 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला के 16वें दिन सूर्पनखा-नासिक छेदन, खरदूषण-वध, सीताहरण, रावण -गिद्धराज-युद्ध की लीला का मंचन हुआ। 
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रामनगर की रामलीला के 16वें दिन लक्ष्मण ने काटी सूर्पनखा की नाक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीराम ने पृथ्वी पर जिस कार्य के लिए अवतार लिया था, उसका आरंभ उन्होंने खर दूषण के वध के साथ कर दिया। वहीं लक्ष्मण ने सूर्पनखा की नाक काटकर राक्षसों के संहार की पटकथा लिख डाली। रामनगर की रामलीला के 16वें दिन सूर्पनखा-नासिक छेदन, खरदूषण-वध, सीताहरण, रावण -गिद्धराज-युद्ध की लीला का मंचन हुआ। 

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शनिवार को लीला की शुरुआत रावण की बहन सूर्पनखा के पंचवटी पहुंचने से हुई। वन में राम और लक्ष्मण को देखकर वह उन पर मोहित हो गई। उसने सुंदर स्त्री का रूप धारण कर राम से विवाह का प्रस्ताव रख दिया। उन्होंने अपने को विवाहित बताते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया। 

श्रीराम सूर्पनखा को लक्ष्मण के पास भेज देते हैं। लक्ष्मण ने भी सूर्पनखा के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। वह भी उसे पुन: राम के पास भेज देते हैं। बार-बार दोनों भाइयों के बीच दौड़ाए जाने पर वह क्रोधित हो गई और असली रूप में आ गई। उसका राक्षस रूप देखकर सीता डर गईं। जिसके बाद राम के इशारे पर लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी। वह रोती हुई अपने भाई खर दूषण के पास गई। खर दूषण अपनी सेना के साथ राम से युद्ध करने पहुंच जाते हैं। अंत में वह श्रीराम के हाथों मारे जाते हैं। 

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रामनगर की रामलीला के 16वें दिन हुई नक्कटैया की लीला - फोटो : अमर उजाला
सूर्पनखा लंका जाकर रावण को सब बात बताती है तो वह उसे समझा कर महल में भेज देता है। उधर लक्ष्मण की अनुपस्थिति में राम ने सीता से कहा कि जब तक मैं नर लीला करता हूं तुम अग्नि में निवास करो। उन्होंने उनसे अपनी प्रतिमूर्ति वहीं छोड़ देने के लिए कहा। यह बात लक्ष्मण को नहीं पता थी। 

मारीच ने समझाया, मत लो राम से बैर
रावण अपने मामा मारीच के पास गया और उसे सब बताता है। मारीच ने रावण को समझाया कि अगर तुम अपने कुल की भलाई चाहते हो तो राम से बैर मत करो। रावण क्रोधित हो जाता है। तब मारीच सब प्रकार से अपनी मृत्यु समझकर भगवान की शरण में जाना उचित समझता है। वह सोने का मृग बनकर राम के पास गया जिसे देखकर सीता उस पर मोहित हो गईं। हिरण को मारने के लिए राम चल पड़े।
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वह वन में बहुत दूर तक चले गए। राम का बाण लगते ही मारीच हाय लक्ष्मण कहकर गिर पड़ा। सीता उसकी आवाज सुनकर लक्ष्मण को राम की सहायता के लिए भेजती हैं। रावण सीता के पास भिक्षा मांगने पहुंचा। सीता ने जैसे ही लक्ष्मण रेखा लांघी रावण ने उनका हरण कर लिया। सीता की दुख भरी आवाज सुनकर जटायु रावण को मूर्छित कर देते हैं। होश में आने पर रावण तलवार से उसका पंख काट देता है।

आकाश मार्ग से जाते समय पर्वत पर बंदरों को बैठा देख सीता चूड़ामणि उतार कर नीचे फेंक देती हैं। वन में लक्ष्मण को अपने पास आते देख राम चिंतित हो गए। उन्होंने कहा कि सीता के बगैर मेरा जीवन नहीं के बराबर है। इससे बड़ी विपत्ति और क्या होगी जो वन में हमने सीता को खो दिया। लक्ष्मण उनसे कहने लगे इसमें मेरा कुछ भी दोष नहीं है। यहीं पर भगवान की आरती के बाद लीला को विराम दिया गया। 
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