रामनगर की रामलीला के 16वें दिन हुई नक्कटैया की लीला
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सूर्पनखा लंका जाकर रावण को सब बात बताती है तो वह उसे समझा कर महल में भेज देता है। उधर लक्ष्मण की अनुपस्थिति में राम ने सीता से कहा कि जब तक मैं नर लीला करता हूं तुम अग्नि में निवास करो। उन्होंने उनसे अपनी प्रतिमूर्ति वहीं छोड़ देने के लिए कहा। यह बात लक्ष्मण को नहीं पता थी।
मारीच ने समझाया, मत लो राम से बैर
रावण अपने मामा मारीच के पास गया और उसे सब बताता है। मारीच ने रावण को समझाया कि अगर तुम अपने कुल की भलाई चाहते हो तो राम से बैर मत करो। रावण क्रोधित हो जाता है। तब मारीच सब प्रकार से अपनी मृत्यु समझकर भगवान की शरण में जाना उचित समझता है। वह सोने का मृग बनकर राम के पास गया जिसे देखकर सीता उस पर मोहित हो गईं। हिरण को मारने के लिए राम चल पड़े।
वह वन में बहुत दूर तक चले गए। राम का बाण लगते ही मारीच हाय लक्ष्मण कहकर गिर पड़ा। सीता उसकी आवाज सुनकर लक्ष्मण को राम की सहायता के लिए भेजती हैं। रावण सीता के पास भिक्षा मांगने पहुंचा। सीता ने जैसे ही लक्ष्मण रेखा लांघी रावण ने उनका हरण कर लिया। सीता की दुख भरी आवाज सुनकर जटायु रावण को मूर्छित कर देते हैं। होश में आने पर रावण तलवार से उसका पंख काट देता है।
आकाश मार्ग से जाते समय पर्वत पर बंदरों को बैठा देख सीता चूड़ामणि उतार कर नीचे फेंक देती हैं। वन में लक्ष्मण को अपने पास आते देख राम चिंतित हो गए। उन्होंने कहा कि सीता के बगैर मेरा जीवन नहीं के बराबर है। इससे बड़ी विपत्ति और क्या होगी जो वन में हमने सीता को खो दिया। लक्ष्मण उनसे कहने लगे इसमें मेरा कुछ भी दोष नहीं है। यहीं पर भगवान की आरती के बाद लीला को विराम दिया गया।