गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा स्थापित तुलसी घाट की रामलीला में बृहस्पतिवार को धनुष यज्ञ लीला का मंचन हुआ। भदैनी स्थित रामलीला मैदान में धनुष यज्ञ की लीला में राजा जनक द्वारा आयोजित स्वयंवर में देश विदेश के राजा महाराजा आए थे, लेकिन भगवान शिव का धनुष तोड़ना तो दूर उसे कोई हिला नहीं पाया। अंत में गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान राम ने तिनके के समान धनुष उठा कर तोड़ दिया।
रामलीला में आज
रामनगर-जयंत नेत्रभंग, अत्रि मुनि मिलन, विराध वध, इंद्र दर्शन, इंद्र दर्शन, शरभंग-सुतीक्षण, अग्रस्त्य समागम, पंचवटी में निवास और गीता उपदेश।
जाल्हूपुर-भरतजी की चित्रकूट से विदाई, अयोध्या आगमन, नंदी ग्राम निवास।
शिवपुर-भरत मनावन।
लाटभैरव-राम घंडइल पार, चित्रकूट पयान, कोल-भील मिलन, दशरथ मरण।
चित्रकूट- राम घंडइल पार, भारद्वाज आश्रम में आतिथ्य, पथिक की झांकी, चित्रकूट में निवास।
लोहता-श्रीराम चंद्र की बारात एवं राम कलेवा।
तुलसी घाट-राज्याभिषेक की तैयार एवं कोप भवन।
भोजूबीर-भरत पयान, निषाद भेंट, भाद्वाज भेंट, चित्रकूट गमन, सीता स्वप्न एवं लक्ष्मण विचार।