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कोरोना काल में नहीं टूटेगी काशी के रामलीला की परंपरा: डिजिटल माध्यम से महीनेभर होगा प्रसारण 

Tue, 15 Sep 2020 12:12 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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देहरादून में रामलीला आयोजन - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना संक्रमण के कारण संकट से जहां लोग परेशान हैं, तो सालों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर बन चुकीं परंपराओं को बचाने का भी संकट उत्पन्न हुआ है। ऐसे में लोग विभिन्न माध्यमों का सहारा ले रहे हैं। ऐसा ही प्रयास काशी में किया जा रहा है कि काशी पुुराधिपति बाबा विश्वनाथ की नगरी की वर्षों पुुरानी विश्वप्रसिद्ध रामलीला के मंचन को को बचाने के लिए।

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इस बार डिजिटल प्लेटफार्म पर पूरी दुनिया 30 दिन रामलीला देखेगी। प्रतिदिन दो मिनट 20 सेकेंड के एपिसोड में प्रत्येक प्रसंग को दर्शाया जाएगा। इस हिसाब से मात्र एक घंटा 10 मिनट में ही संपूर्ण रामायण प्रसारित हो जाएगी।

काशी घाट वॉक के ट्विटर हैंडल पर रामलीला का प्रसारण एक अक्टूबर से 30 तक किया जाएगा। डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रसारण के लिए रामलीला की रिकार्डिंग शुरू हो चुकी है। विभिन्न पात्रों के संवाद भी डब किए जा रहे हैं।
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काशी घाट वॉक के संस्थापक, बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. वीएन मिश्रा ने बताया कि रामलीला का क्रम रामनगर की रामलीला के आधार पर निर्धारित किया गया है। वीडियो में दिखने वाले पात्र लुगदी से बने मुखौटे धारण करेंगे। विदेशों में रामलीला करने वाले कलाकारों को भेजने के लिए मुखौटों के 35 सेट तैयार कर लिए गए हैं।
 

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बाबा विश्वनाथ - फोटो : अमर उजाला

बाबा विश्वनाथ को अर्पित करेंगे रामलीला के मुखौटे 

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण की खुशी में विदेशी रामलीला कलाकारों को भेंट करने के लिए बनाए गए रामलीला के मुखौटे सबसे पहले काशी विश्वनाथ को अर्पित किए जाएंगे। 14 सितंबर को काशी विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन मंदिर और मां गंगा को अर्पित करने के बाद मुखौटों का सेट 15 सितंबर के बाद किसी भी दिन रवाना कर दिया जाएगा। मुखौटों की पहली खेप जिन देशों को भेजी जाए।
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